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    Home»जोहार ब्रेकिंग»धनबाद : मेहनत से कचड़े के ढेर को बना डाला उपजाऊ भूमि, अब मंडियों में पहुंचती है यहां से सब्जियां
    जोहार ब्रेकिंग

    धनबाद : मेहनत से कचड़े के ढेर को बना डाला उपजाऊ भूमि, अब मंडियों में पहुंचती है यहां से सब्जियां

    Team JoharBy Team JoharAugust 22, 2020No Comments3 Mins Read
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    Joharlive Team

    धनबाद। अमूमन लोग कचड़े को देखकर नाक और मुंह सिकोड़ने लगते हैं। लेकिन इसी कचड़े ने सैकड़ों लोगों की जिदंगी बदल दी है। जी हां, यह सच्चाई है। धनबाद जिले के झरिया के होरलाडीह में सैंकड़ों परिवार ने कचड़े के ढ़ेर पर हरियाली की चादर बिछाने का नायाब काम किया है। अब इन सैकड़ों परिवरों के जीवन यापन का मुख्य साधन बन चुका है। हरियाली की चादर ओढ़े यह झरिया का होरलाडीह इलाके में कभी उबड़ खाबड़ और बड़े बड़े गड्ढे हुआ करते थे। लेकिन बिहार से झरिया पहुंचे लोगों ने इस जगह को अपने खून पसीने के दम पर इस बंजर जमीन को सोना उगलने वाली धरती बना डाला।

    करीब 50 साल पूर्व बिहार से झरिया पहुंचे लोगों की नजर इस बंजर जगह पर पड़ी। फिर मन में इस बंजर जमीन को संवारने के ख्याल आया। जिसके बाद झरिया बाजार से निकलने वाले कूड़े कचड़े पर लोगों का ध्यान गया। माडा के अधिकारियों से कहकर लोगों ने उन तमाम कूड़े और कचड़ों का यहां डंप करवाया। इसके बाद लोगों ने उसमें से ईंट पत्थर जैसे बेकार आविष्ट पदार्थों को छांटकर अलग किया। फिर मेहनत कर समतल किया और सिंचाई शुरू कर दी। वह समय भी आया जब इनकी मेहनत रंग लाई और खेतों में लगाई गई सब्जियां लहलहा उठी। आज ये सैकड़ों परिवार इस खेती पर जीविकोपार्जन करते हैं। विभिन्न मंडियों में सब्जियों की थोक बिक्री की जाती है, जिससे इन्हें एक अच्छी खासी इनकम होती है।

    पिछले कुछ सालों से सिंचाई को लेकर परेशानी बढ़ गई है। बीसीसीएल की भूतगड़िया माइंस से निकलने वाली पानी का उपयोग ये सिंचाई के रूप में करते थे। लेकिन माइंस बंद होने के कारण अंदर से पानी निकलना बंद हो गया है। जिसके कारण सिंचाई को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बारिश में तो ये खेती कर लेते हैं। लेकिन गर्मी के दिनों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण पूरी खेती नहीं कर पाते हैं। उस वक्त आंशिक खेती कर यह जीवन बसर करना पड़ता है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें सिंचाई के लिए उचित व्यवस्था करें।

    लोगों का कहना है कि बोरिंग या खदान का पानी इन्हें सालभर मिले तो सिंचाई की व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। इसके साथ ही लोगों ने कहा कि सरकार की ओर से यूरिया व फर्टिलाइजर पर सब्सिडी दी गई है। लेकिन बाजारों में ऊंची कीमतों पर उन्हें मिलता है, यहां बसे किसानों ने कहा कि हमारे साथ साथ सैकड़ों मजदूर भी खेतों में काम करते हैं। सरकार यदि हम वह तमाम सुविधा उपलब्ध कराए जो खेती के लिए जरुरी है तो कई बेरोजगारों का रोजगार यहां चलता रहेगा।

    लोगों का मानना है कि कोरोना काल में कृषि ही सर्वोपरि है। कृषि से ही आनेवाले भविष्य में देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। खून पसीने से इस जमीन को सींचने वाले लोगों की तरह ही सरकार को इनके साथ साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को थोड़ी पहल सिंचाई के लिए जरूर करना चाहिए।

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