झारखंड में एक्टिव अपराधी गिरोह ‘डेविल्स ग्रुप’ के खिलाफ पुलिस अब आर-पार के मूड में है. गुरुवार को झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पुलिस मुख्यालय के सभागार में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की. इसका मकसद गोड्डा, दुमका और आसपास के इलाकों में आतंक मचा रहे डेविल्स ग्रुप के खिलाफ सख्त एक्शन प्लान तैयार करना था.
बैठक में आईजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह, दुमका के आईजी पटेल मयुर कनैयालाल और एसपी अभियान दीपक कुमार शर्मा खुद मौजूद रहे, जबकि दुमका के डीआईजी अंबर लकड़ा, दुमका एसपी पीतांबर सिंह खरवार और गोड्डा एसपी मुकेश कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े.
बैठक में इस संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए गोड्डा, दुमका, जामताड़ा और देवघर को मिलाकर एक संयुक्त विशेष टीम बनाने का बड़ा फैसला लिया गया. यह स्पेशल टीम डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी और चारों जिलों में इस गिरोह की सभी वारदातों की मिलकर जांच करेगी. इस टीम के काम की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट दुमका के आईजी को सौंपी जाएगी.
इसके साथ ही डीजीपी ने दुमका के डीआईजी को डेविल्स ग्रुप से जुड़े सभी संदिग्धों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिये. उन्होंने ज्वेलरी लूट और छिनतई के लंबित मामलों को जल्द सुलझाने, अवैध हथियारों की तस्करी रोकने और पड़ोसी राज्यों की पुलिस से तालमेल बिठाने को कहा.
डीजीपी ने साफ किया कि अपराधियों को पकड़ने के साथ ही उन्हें सजा दिलाना जरूरी है. इसके लिए उन्होंने गिरफ्तार अपराधियों के खिलाफ वैज्ञानिक सबूत जुटाने, गवाहों की समय पर उपस्थिति पक्की करने, जमानतदारों की जांच करने और कोर्ट में स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द सजा दिलाने के निर्देश दिए. अंत में उन्होंने आला अधिकारियों को खुद क्षेत्र में लगातार घूमने और पीसीआर द्वारा सघन गश्त बढ़ाने का आदेश दिया ताकि जनता में सुरक्षा का माहौल बना रहे.
क्या है डेविल्स ग्रुप, कैसे देता है वारदात को अंजाम?
‘डेविल्स ग्रुप’ झारखंड के संथाल परगना इलाके, खासकर दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और देवघर जिलों में एक्टिव एक बेहद शातिर और संगठित आपराधिक गिरोह है. यह कोई आम चोर-बदमाशों का झुंड नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत वारदातों को अंजाम देने वाला गैंग है. इस गिरोह का टारगेट सोने-चांदी के व्यापारी और ज्वेलरी शोरूम होते हैं, जहां ये हथियारों के बल पर चंद मिनटों में करोड़ों की लूट कर फरार हो जाते हैं. इसके अलावा, राह चलती महिलाओं से सोने के गहने छीनना और बैंक से पैसे निकालकर निकलने वाले लोगों से सरेराह छिनतई करना इस गैंग के गुर्गों का रोज का काम बन चुका है. इनके पास हाइटेक और अवैध हथियारों का बड़ा जखीरा है, जिसका इस्तेमाल ये न सिर्फ वारदातों में करते हैं बल्कि अंतर्राज्यीय नेटवर्क के जरिए इनकी तस्करी भी करते हैं.
ये अपराधी झारखंड के सीमावर्ती जिलों में वारदात को अंजाम देते हैं और तुरंत भागकर पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार या पश्चिम बंगाल में छिप जाते हैं. गिरोह के सरगना स्थानीय स्तर पर ऐसे भटके हुए युवाओं को जाल में फंसाते हैं जो शॉर्टकट से पैसा कमाना चाहते हैं. इन नए लड़कों को बाइक चलाने और हथियार संभालने की ट्रेनिंग देकर गैंग में शामिल किया जाता है. पुलिस से बचने के लिए ये लोग लगातार अपने ठिकाने, मोबाइल सिम और गाड़ियां बदलते रहते हैं. इसी बढ़ते आतंक और नेटवर्क को देखते हुए झारखंड पुलिस ने अब चार जिलों को मिलाकर एक संयुक्त विशेष टीम बनाई है, जो इनके खिलाफ वैज्ञानिक सबूत जुटाकर और कोर्ट में स्पीडी ट्रायल चलाकर इन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाएगी.

