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    Home»क्राइम»कभी नक्सलियों का गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ में CRPF ने फहराया तिरंगा
    क्राइम

    कभी नक्सलियों का गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ में CRPF ने फहराया तिरंगा

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJanuary 26, 2025Updated:January 26, 2025No Comments3 Mins Read0
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    बूढ़ा
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    Garhwa : कभी नक्सलियों का गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ आज गुलजार है. कभी यह इलाका गोलियों और बम के धमाकों से थर्राता था, पर आज यहां खुशी का माहौल रहता है. आज यानी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर यहां तिरंगा फहराया गया. CRPF की 172वीं बटालियन ने शान से यहां तिरंगा फहराया. राष्ट्रगान के बाद सलामी भी दी गयी. वहीं, मौके पर मौजूद बच्चों और ग्रामीणों के बीच मिठाईयां बांट यह संदेश दिया गया कि यह इलाका अब पूरी तरह से नक्लसवाद मुक्त है.

    बुढा

    बूढ़ा पहाड़ झारखंड में स्थित एक क्षेत्र है. राज्य की राजधानी रांची से लगभग 150 किमी दूर नक्सल प्रभावित रहे लातेहार और गढ़वा जिलों के साथ स्थित ‘बूढ़ा पहाड़’ को 30 साल के बाद सुरक्षा बलों ने ‘लाल आतंक’ से मुक्त कराया था. इस क्षेत्र की सीमाएं झारखंड के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी मिलती है. बूढ़ा पहाड़ बेहद दुर्गम इलाका था. जिस तरह लंका दहन के लिए राम सेतु का निर्माण किया गया था. कुछ उसी तरह बूढ़ा पहाड़ पर पहुंचने के लिए ओणम सेतु बनाया गया.

    वो 1990 का दौर था. देश के कई हिस्सों में नक्सलवाद के पांव जमे हुए थे. ऐसा ही एक हिस्सा था- बूढ़ा पहाड़. झारखंड का बूढ़ा पहाड़, जो छत्तीसगढ़ की सीमा से सटता है और बड़ा ही दुर्गम इलाका है. वहां पहुंचना काफी मुश्किल था और यही वजह थी कि नक्सलियों ने इसे अपना गढ़ बना रखा था. आईडी बम लगाकर सुरक्षाबलों की हत्या कर देना, पुलिस मुखबिरी के नाम पर गांव के लोगों को मार डालना नक्सलियों के लिए आम बात थी.

    अपने अभेद्य किले से नक्सली न केवल झारखंड में खूनी खेल खेलते थे, बल्कि बिहार और छत्तीसगढ़ में भी नक्सल ऑपरेशन की रणनीति तैयार करते थे. यह एक तरह से नक्सलियों का बेस कैंप था. तीन दशक के बीच नक्सलियों के खिलाफ कई बार पुलिस की ओर से अभियान चलाए गए. नक्सलियों का यह तिलिस्म आखिरकार 2022 में ध्वस्त हो गया और पूरे बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों के आतंक से मुक्त करा लिया गया. और फिर यहां भी विकास की किरण पहुंचने लगी.

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