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    Home»जोहार ब्रेकिंग»डेमोग्राफी में बदलाव के बहाने कुछ खास समुदाय निशाने परः अलीफा
    जोहार ब्रेकिंग

    डेमोग्राफी में बदलाव के बहाने कुछ खास समुदाय निशाने परः अलीफा

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 24, 2026Updated:June 24, 2026No Comments3 Mins Read2
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    Joharlive Desk : केंद्र सरकार द्वारा गठित ‘हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. ऑल इंडिया फेमिनिस्ट अलायंस (ALIFA-NAPM) ने कमेटी के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि डेमोग्राफी जैसे व्यापक विषय को “गैर-कानूनी इमिग्रेशन” और कुछ खास समुदायों तक सीमित किया जा रहा है, जिससे सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ने का खतरा है.

    ALIFA ने मांग की है कि कमेटी के ToR की दोबारा समीक्षा की जाए और इसे संविधान, मानवाधिकार और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर तैयार किया जाए. संगठन का कहना है कि डेमोग्राफी केवल आबादी बढ़ने या घटने का विषय नहीं है. इसमें जन्म दर, मृत्यु दर, महिलाओं की स्थिति, वृद्ध होती आबादी, पलायन, शहरीकरण, लैंगिक असमानता और परिवारों की बदलती संरचना जैसे कई पहलू शामिल हैं. ALIFA का आरोप है कि कमेटी के आठ में से सात बिंदु “गैर-कानूनी इमिग्रेशन” और “अवैध प्रवासियों” पर केंद्रित हैं, जबकि देश में हो रहे अन्य महत्वपूर्ण जनसंख्या परिवर्तनों को नजरअंदाज किया गया है.

    संगठन ने चिंता जताई है कि कमेटी को धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच जनसंख्या बदलाव का अध्ययन करने का काम दिया गया है, लेकिन साथ ही बार-बार “डेमोग्राफिक असंतुलन” और “गैर-कानूनी इमिग्रेशन” का उल्लेख किया गया है. ALIFA का कहना है कि इससे यह संदेश जा सकता है कि कुछ खास समुदायों को जनसंख्या बदलाव के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है.

    फेमिनिस्ट संगठन ने कहा कि इतिहास बताता है कि जब भी जनसंख्या को लेकर डर या आशंका का माहौल बनाया जाता है, उसका असर सबसे ज्यादा महिलाओं, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर मौजूद समुदायों पर पड़ता है. संगठन ने दावा किया कि हाल के वर्षों में “गैर-कानूनी इमिग्रेशन” के नजरिए से चलाए गए कुछ अभियानों में महिलाओं और मुस्लिम समुदाय के मुकाबले ज्यादा असर देखा गया.

    जनगणना पूरी होने तक कमेटी का काम टालने की मांग

    ALIFA ने सरकार से आग्रह किया है कि कमेटी का काम शुरू करने से पहले देश में चल रही जनगणना पूरी की जाए. संगठन का कहना है कि बिना विश्वसनीय और अद्यतन आंकड़ों के किसी भी डेमोग्राफिक अध्ययन से गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं. उनका तर्क है कि जनगणना के बाद मिलने वाले आंकड़े ही देश में हो रहे वास्तविक जनसंख्या बदलावों को समझने का मजबूत आधार बन सकते हैं.

    ALIFA ने कहा कि भारत की जनसंख्या से जुड़े सवालों को संदेह, डर और राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. इसके बजाय नीतियां संविधान, समानता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए. संगठन का कहना है कि भारत के डेमोग्राफिक भविष्य को “खतरे” के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास, समावेशन और न्याय के नजरिए से देखने की जरूरत है.

    Also Read : 24 जून 1974 : जब 42 रन पर ऑल आउट हो गई थी टीम इंडिया
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