रांची में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय (RPAO), CISF, गृह मंत्रालय में तैनात तीन अधिकारियों को ₹48,400 रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार अधिकारियों में वरिष्ठ लेखा अधिकारी संतोष कुमार महतो, सहायक लेखा अधिकारी सुनील कुमार और सहायक लेखा अधिकारी सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं. तीनों पर आरोप है कि उन्होंने CISF कर्मियों के लंबित बिलों का भुगतान आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगी थी.
बिल पास कराने के लिए मांगी थी रिश्वत
मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित CISF NTPC यूनिट से जुड़ा है. वहां तैनात हेड कांस्टेबल रविकांत त्रिपाठी ने CBI में शिकायत की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यूनिट के कर्मचारियों के यात्रा भत्ता (TA), बच्चों के शिक्षा भत्ता (CEA) समेत दूसरे लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए तीनों अधिकारी रिश्वत मांग रहे थे. शिकायत मिलने के बाद CBI ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया. आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी.
शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल
CBI को कार्रवाई के लिए झारखंड सरकार से दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत जरूरी सहमति मिली. इसके बाद 26 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की गई. मामले में BNS की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया. इसके अगले ही दिन यानी 27 अगस्त को CBI ने RPAO कार्यालय, रांची में ट्रैप लगाया. जैसे ही शिकायतकर्ता ने अधिकारियों को ₹48,400 की रिश्वत दी, पहले से तैयार CBI टीम ने तीनों को मौके पर ही पकड़ लिया. रिश्वत की पूरी रकम भी टीम ने बरामद कर ली.
रांची और धनबाद के 5 ठिकानों पर छापेमारी
तीनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद CBI ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए रांची और धनबाद में पांच ठिकानों पर छापेमारी की. तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और नकदी मिलने की बात सामने आई है. CBI की टीम बरामद सामान और दस्तावेजों की जांच कर रही है.
CBI ने तीनों गिरफ्तार अधिकारियों को हिरासत में ले लिया है. उन्हें 28 अगस्त को सक्षम CBI अदालत में पेश किया जाएगा. फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है. CBI यह भी पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इससे जुड़े अन्य लेनदेन हुए हैं या नहीं.
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