लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति से जुड़े बयान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. बेमेतरा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी पर हिंदू धर्मग्रंथों के अपमान का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राहुल गांधी अपने बयान को लेकर माफी नहीं मांगते हैं, तो कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा और हिंदुओं से पार्टी का बहिष्कार करने की अपील की जाएगी.
‘धर्मग्रंथों का अपमान बिल्कुल गलत’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, “राहुल गांधी बार-बार हमारे धर्मग्रंथ का अपमान कर रहे हैं. यह बिल्कुल गलत बात है.” उन्होंने कहा कि चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य व्यक्ति, देश ही नहीं बल्कि दुनिया में किसी को भी हिंदू धर्मग्रंथों का अपमान करने का अधिकार नहीं है.
उन्होंने धर्मग्रंथों को श्रद्धा और आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि इनमें लिखी बातों को समझे बिना उन पर टिप्पणी करना उचित नहीं है. शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो व्यक्ति धर्म की बातों को नहीं समझता, वह धर्मग्रंथों के बारे में क्या जानेगा.
‘माफी नहीं मांगी तो कांग्रेस का बहिष्कार’
शंकराचार्य ने राहुल गांधी से कथित टिप्पणी को लेकर माफी मांगने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी इसी तरह की बातें करते रहे और क्षमा याचना नहीं की, तो कांग्रेस के खिलाफ मुहिम चलाई जाएगी.
उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत हिंदुओं से कांग्रेस का बहिष्कार करने और पार्टी को कभी वोट नहीं देने की अपील की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मग्रंथों के अपमान को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी बोले
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में मनुस्मृति में महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े संदर्भों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता की बात करने के साथ उनकी सुरक्षा और भरण-पोषण की जिम्मेदारी पर भी विचार किया जाना चाहिए.
उन्होंने रक्षा बंधन का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि यदि भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, तो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी की भावना को गलत कैसे कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि बचपन में बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी पिता, विवाह के बाद पति और वृद्धावस्था में मां की देखभाल की जिम्मेदारी बेटे की होने की बात को भी इसी संदर्भ में समझना चाहिए.
‘महिलाओं की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी’
शंकराचार्य ने कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने और जीवन जीने की बात अपनी जगह है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने सवाल उठाया कि संकट की स्थिति में परिवार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता.
मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर शंकराचार्य की यह प्रतिक्रिया अब सियासी और सामाजिक बहस को और तेज कर सकती है. एक ओर राहुल गांधी के बयान को लेकर आपत्ति जताई गई है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की स्वतंत्रता, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर मनुस्मृति की प्रासंगिकता पर बहस भी सामने आ गई है.
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