New Delhi : संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि सत्र के दौरान मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क (टैरिफ), डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट, वायु प्रदूषण और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।

मंगलवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बजट सत्र को लेकर चर्चा हुई। हालांकि कांग्रेस ने बैठक में यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई कि सरकार ने अब तक कोई विधायी एजेंडा सामने नहीं रखा है। सरकार की ओर से कहा गया कि एजेंडा बाद में जारी किया जाएगा, क्योंकि सत्र का पहला चरण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और केंद्रीय बजट पर चर्चा पर केंद्रित रहेगा।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को कमजोर कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष विदेश नीति का मुद्दा भी उठाएगा। प्रमोद तिवारी ने कहा, “हमारी विदेश नीति किस दिशा में जा रही है? कोई देश हमारे साथ खड़ा नहीं दिख रहा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि हम किसके साथ हैं और कौन हमारे साथ है।”

उन्होंने सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे टैरिफ और रूसी तेल खरीद के मुद्दे को भी संसद में उठाया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली और अन्य शहरों में गंभीर होते वायु प्रदूषण तथा इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल रहेगा।
मनरेगा, जम्मू-कश्मीर और बेरोजगारी भी एजेंडे में
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा बेहद अहम है। उनका आरोप है कि इस योजना का नाम बदलकर महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश ने मनरेगा को बहाल करने की मांग की। इसके अलावा विपक्ष जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, वोट चोरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी सत्र के दौरान उठाएगा।
अन्य दलों के मुद्दे भी होंगे शामिल
तेलुगू देसम पार्टी (टीडीपी) के सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत द्वारा किए जा रहे विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने अमरावती को हैदराबाद की तर्ज पर कानूनी दर्जा देने की भी मांग की।
वहीं, बीजू जनता दल (BJD) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा में किसानों की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा संसद में उठाएगी।
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