– सीआइडी जांच में हुआ खुलासा, पैसे की हुई लेयरिंग भी
– फर्जी कंपनी के एकाउंट में भी रुपये किये गए ट्रांसफर
किसलय शानू
Ranchi : बिजली विभाग से 56.5 करोड़ रुपये घोटाले मामले में सीआइडी जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सीआईडी ने जांच में पाया है कि घोटाले की उक्त रकम से 20 लाख रुपये घड़ी बेचने वाली कंपनी के एकाउंट में भी ट्रांसफर किए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, झारखंड राज्य विद्यत कर्मचारी मास्टर ट्रस्ट के खाते से लगभग 56.5 करोड़ रुपये की राशि संदिग्ध तरीके से विभिन्न निजी खातों में स्थानांतरित की गई। इस मामले में धन के लेन-देन की जटिल प्रक्रिया, जिसे ‘लेयरिंग’ कहा जाता है, का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि यह राशि पहले कई फर्जी या संदिग्ध फर्मों—जैसे हरेश ट्रेडर्स, अशोक इलेक्ट्रॉनिक्स, राजीव टेक्सटाइल और आदर्श डीलर्स—के खातों में ट्रांसफर की गई। इसके बाद इन खातों से पैसे को अलग-अलग माध्यमों से आगे बढ़ाया गया, ताकि उसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
इसी क्रम में जांच एजेंसी ने पाया है कि 20 लाख रुपये की एक राशि मेसर्स स्वॉच ग्रुप के एकाउंट में भी गई है। इस कंपनी का ऑफिस दिल्ली में है। कंपनी के सिटी बैंक स्थित एकाउंट नंबर 0007565003 में पैसे ट्रांसफर हुए है। सिटी बैंक का यह ब्रांच वेस्ट पंजाबीबाग न्यू दिल्ली में है। यह कंपनी विभिन्न घड़ियों के ब्रांड जैसे राडो, टीस्सॉट, लॉगीनेस, ओमेगा और इसके स्पेयर पाट्स का इंपोर्ट, डिस्ट्रीब्यूशन और रिसेल का काम करती है।
सीआईडी ने पैसे को संदिग्ध लेयरिंग मानते हुए किया फ्रिज
सीआईडी ने इस ट्रांजेक्शन को संदिग्ध मानते हुए संबंधित बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। सीआईडी का कहना है कि यह राशि कथित गबन से जुड़ी हो सकती है और मामले की गहराई से जांच जारी है। सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले में कई लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। यह मामला राज्य में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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