नेपाल के तराई इलाके में भारी बारिश के बाद बिहार में बाढ़ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है. खासकर गंडक नदी के नदी बेसिन क्षेत्र में हो रही बारिश को देखते हुए सीमावर्ती और नदी से जुड़े जिलों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं.
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में शनिवार को आपदा प्रबंधन विभाग में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ 18 जिलों के डीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े.
बता दें, वर्तमान में बिहार के 15 जिले पहले से ही बाढ़ के चपेट में है औऱ इससे 50 लाख से अधिक लोग लोग प्रभावित हैं.
इन जिलों में बढ़ाई गई निगरानी
सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय समेत अन्य संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने को कहा गया है.
प्रशासन को नदियों के जलस्तर और बहाव के साथ निचले इलाकों, तटबंधों, नदी किनारे बसे गांवों, पुल-पुलियों और संपर्क मार्गों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.
कोसी नदी के जलस्तर में फिलहाल गिरावट दर्ज की गई है. इसके बावजूद कोसी से जुड़े जिलों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि जलस्तर में अचानक बदलाव होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
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NDRF-SDRF को तैयार रहने के निर्देश
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को तैयार रहने को कहा गया है. जिलों में नाव, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और राहत-बचाव के दूसरे जरूरी संसाधन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं.
संभावित प्रभावित इलाकों में माइकिंग के जरिए लोगों को पहले से चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है.
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए लोगों और जनप्रतिनिधियों को स्थिति की सही जानकारी देने का निर्देश दिया है. सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और घबराने से बचने की अपील की है.
जिला प्रशासन, पुलिस, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को लगातार समन्वय बनाए रखने को कहा गया है. आपातकालीन सहायता के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है.
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