Ranchi : राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा राजनीतिक सुझाव देते हुए कहा है कि उन्हें कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाने पर विचार करना चाहिए। सरयू राय ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक गठबंधन की रणनीति के मुताबिक वोट नहीं कर सके। मॉक पोल के दौरान भी जिस तरह की एकजुटता दिखनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी। ऐसे में कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
सरयू राय ने बताया 41 का फॉर्मूला
सरयू राय ने कहा कि झामुमो के 34 विधायक, राजद के 4 विधायक और वाम दलों के 2 विधायक मिलाकर 40 विधायक होते हैं। यदि उनका समर्थन जोड़ लिया जाए तो संख्या 41 हो जाती है। वहीं जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने पर आंकड़ा 42 तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक इस संख्या के साथ कांग्रेस के बिना भी स्थिर सरकार चलाई जा सकती है।
यह पहली बार नहीं
सरयू राय लंबे समय से खुद को सत्ता और विपक्ष के बीच एक स्वतंत्र राजनीतिक धुरी के रूप में पेश करते रहे हैं। 2019 में भाजपा छोड़ने के बाद से वे कई बार हेमंत सोरेन सरकार को मुद्दों पर समर्थन और सलाह देते रहे हैं। जुलाई 2024 में हेमंत सोरेन के फिर से मुख्यमंत्री बनने पर भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उन्हें “दलालों और भ्रष्ट मध्यस्थों से दूर रहने” की सलाह दी थी और कहा था कि सरकार को कांग्रेस या दूसरे सहयोगियों के दबाव से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।
कांग्रेस से दूरी की सलाह क्यों…
इसके पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। पहला, राज्यसभा चुनाव से पहले भी झामुमो और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए थे। कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था, जबकि झामुमो नेतृत्व ने नाराजगी जताई थी कि उनसे पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया। बाद में दोनों दलों को समझौता करना पड़ा।
दूसरा, सरयू राय लंबे समय से कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक गुटबाजी को झारखंड सरकार के लिए बोझ मानते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद उन्हें यह तर्क और मजबूत मिलता दिख रहा है कि कांग्रेस गठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी बन गई है।
तीसरा, झामुमो और कांग्रेस के बीच समय-समय पर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी सामने आती रही है। राज्यसभा सीट को लेकर हालिया विवाद ने भी दोनों दलों के रिश्तों में खिंचाव उजागर किया था।
जयराम महतो भी दे चुके हैं संकेत
JLKM सुप्रीमो और विधायक जयराम महतो ने पिछले कुछ महीनों में कई बार कहा है कि उनकी राजनीति भाजपा और कांग्रेस दोनों से अलग है। हालांकि उन्होंने खुलकर हेमंत सरकार में शामिल होने की बात नहीं कही है, लेकिन कई मौकों पर यह जरूर कहा कि यदि झारखंड के हित में कोई प्रस्ताव आता है तो उसका समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है। यही वजह है कि सरयू राय ने अपने नए राजनीतिक समीकरण में जयराम महतो का नाम भी जोड़ा है।
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