भारत के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से बने कटेंट हटाने की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की भी मांग की है.अभिषेक ने एआई से बने कंटेंट से बदनाम करने की बात कह अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल उनकी इस याचिका पर सुनवाई को टाल दिया है. कोर्ट ने केस पर थोड़ी देर सुनवाई की लेकिन उसके बाद बताया कि इसमें नियमों के उल्लंघन करने वाले यूआरएल के स्क्रीनशॉट नहीं लगाए गए थे. इसकी वजह से जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई टाल दी. न्यायलय ने अभिषेक के वकील को आदेश दिया है कि वे अर्जी में, जो लिखा गया है, उससे संबंधित स्क्रीनशॉट लगाएं.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा, ‘हम रोज ऐसे मामले देखते हैं, जहां मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच बेहद पतली रेखा होती है. यह क्षेत्र अभी विकसित हो रहा है. दोनों के बीच कुछ हद तक ओवरलैप भी है. कई बार मानहानि से जुड़ी सामग्री में पर्सनैलिटी राइट्स का पहलू भी शामिल हो सकता है.’
मेटा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि जिन आठ वेब लिंक पर फिलहाल सुनवाई हो रही है, उनमें से दो अब उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि एक अन्य लिंक महज “पापाराजी शैली की पोस्ट” प्रतीत होती है और पहली नजर में इसे पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता. मेटा की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यदि हर नकारात्मक ऑनलाइन सामग्री को पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन माना जाएगा, तो मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) कंपनियों के लिए इंटरनेट से ऐसे सभी कंटेंट हटाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन हो जाएगा.
पर्सनैलिटी राइट क्या हैं?
पर्सनैलिटी राइट किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की रक्षा से जुड़े अधिकार हैं. संविधान में अलग से पर्सनैलिटी राइट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. यह अनुच्छेद 21 के तहत मिले प्राइवेसी के अधिकार के तहत ही आता है. इसे ऐसे समझ सकते हैं. संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए अलग से कोई मौलिक अधिकार नहीं दिया गया है जबकि यह अनुच्छेद 19 (1) ए के तहत सभी नागरिकों को बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का ही हिस्सा है.
इसी तरह आसान शब्दों में कहें तो पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी से जुड़ी प्राइवेसी की रक्षा करने वाले अधिकार हैं. पर्सनॉलिटी राइट्स प्राइवेसी यानी निजता के अधिकार का ही हिस्सा है. इसके अलावा कॉपीराइट, ट्रेडमार्क जैसे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट भी पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के काम आते हैं.
AI और डीपफेक के बढ़ते खतरे के बीच भारत में अबतक 15 से ज्यादा चर्चित हस्तियां पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत पहुंच चुके हैं. इनमें अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, अनिल कपूर, सलमान खान, जैकी श्रॉफ, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अजय देवगन, करण जौहर, अरिजीत सिंह, दलेर मेहंदी, अरिजीत सिंह, जुबिन नौटियाल, कुमार सानू, सुनील गावस्कर और अमन गुप्ता समेत कई बड़े नाम शामिल हैं.
कमर्शियल पर्सनैलिटी राइट्स का पहला बड़ा मामला भारत में 2003 में गायक दलेर मेहंदी ने दायर किया था. वहीं, दिसंबर 2025 में सुनील गावस्कर पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत पहुंचने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बने.
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति को उसके नाम, फोटो, आवाज और पहचान के गलत इस्तेमाल से बचाते हैं. इससे बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल, डीपफेक, एआई से बने फर्जी कंटेंट और मानहानि के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर अदालत से कंटेंट हटाने और हर्जाने की भी मांग की जा सकती है. इन अधिकारों का इस्तेमाल करने में कोई कानूनी नुकसान नहीं है, लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, वकीलों पर खर्च आता है और कुछ मामलों में व्यंग्य या रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े विवाद भी खड़े हो सकते हैं.
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