Ranchi : कोरोना के बाद से रांची विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। छात्रों का आरोप है कि सत्र एक-दो साल लेट चल रहा है और परीक्षा में गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को फेल कर दिया जा रहा है।
मुख्य गेट पर 8 घंटे तक तालाबंदी
सोमवार को छात्रों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। खूंटी, लोहरदगा, गुमला और रांची से आए सैकड़ों छात्रों ने मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया और पूरे दिन नारेबाजी होती रही। छात्र-छात्राएं 8 घंटे तक भूखे-प्यासे धरने पर बैठे रहे, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
शाम को प्राक्टर पहुंचे, दिया आश्वासन
शाम करीब 5 बजे प्राक्टर मुकुंद चंद्र मेहता मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि 16 तारीख को सभी पदाधिकारी मौजूद रहेंगे और मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
कुलपति ने देर शाम संभाला पदभार
हंगामे के बीच नई कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने शाम के बाद आईक्यूएसी, मोरहाबादी में पदभार ग्रहण किया। इस दौरान छात्रों ने उनकी नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए और जांच की मांग की।
राजनीतिक समर्थन भी मिला
धरना स्थल पर कांग्रेस नेता कुमार राजा पहुंचे और छात्रों का समर्थन किया। साथ ही एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव समेत कई छात्र नेताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
छात्रों की मुख्य मांगें
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई अहम मांगें रखीं:
- सत्र 2023-27 की परीक्षा तिथि जल्द घोषित हो
- रिजल्ट में हुई गड़बड़ी की जांच
- पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी बने
- उत्तर पुस्तिका गायब होने के मामलों की जांच
- पीएचडी प्रवेश परीक्षा जल्द हो
- छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं
- डिजिटल सिस्टम और पोर्टल दुरुस्त हो
- शिक्षकों की कमी दूर की जाए
छात्रों का दर्द: “हमारा साल बर्बाद हो रहा”
धरना दे रहे छात्रों का कहना है कि समय पर रिजल्ट और परीक्षा नहीं होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कई छात्रों ने बताया कि उनका कोर्स अब तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन सत्र में देरी के कारण वे अभी भी परीक्षा दे रहे हैं।
आंदोलन फिलहाल खत्म, लेकिन नाराजगी कायम
प्रशासन के आश्वासन के बाद छात्रों ने तालाबंदी खत्म कर दी, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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