जोहार लाइव ब्यूरो
महज 250 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत कर हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले SIS Group के संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद रविंद्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) का निधन हो गया है. उनके निधन से उद्योग और राजनीतिक जगत में शोक है.
पत्रकारिता से करियर शुरू करने वाले आर.के. सिन्हा ने कारोबार और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. बिहार के बक्सर में जन्मे आर.के. सिन्हा का झारखंड और रांची से भी खास जुड़ाव रहा. उनकी स्थापित कंपनी SIS Group का झारखंड में व्यापक नेटवर्क है. रोजगार से लेकर सामाजिक गतिविधियों तक कंपनी की मौजूदगी राज्य में रही है.
रांची में SIS के कई कार्यालय, हरमू में है झारखंड रीजनल ऑफिस
आर.के. सिन्हा की कंपनी SIS Group का झारखंड में मजबूत कारोबारी नेटवर्क है. हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित हरमू मार्ग पर SIS कंपनी का झारखंड रीजनल ऑफिस है. इसके अलावा लालपुर के ईस्टर्न मॉल में भी SIS का कार्यालय है. रांची के कोकर स्थित इमाम कोठी में SIS Cash Services का कार्यालय भी है.
झारखंड के दूसरे शहरों में भी कंपनी की मौजूदगी है. कंपनी SIS का कार्यालय देवघर, धनबाद, हजारीबाग और जमशेदपुर में भी है.
झारखंड के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार देने पर जोर
आर.के. सिन्हा की कारोबारी सोच में रोजगार सृजन को अहम स्थान मिला. आर के सिन्हा के वेबसाइट के अनुसार, SIS Group और बिहार-झारखंड के विभिन्न सामाजिक एवं धर्मार्थ संगठनों के माध्यम से 2 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की बात है. वहीं, समाज के वंचित वर्गों के 1 लाख से अधिक लोगों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर तैयार करने का दावा किया गया है.
उनकी सोच थी कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि कौशल के दम पर रोजगार हासिल करने में सक्षम बनाया जाए. इसी दिशा में कौशल विकास और निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया गया.
परिवार का भी रांची से रहा शैक्षणिक जुड़ाव
आर.के. सिन्हा के परिवार का भी रांची से एक खास संबंध रहा है. उनकी पत्नी रीता किशोर सिन्हा ने रांची विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातक और कानून की पढ़ाई की है. उन्हें कानूनी क्षेत्र में करीब 32 वर्षों का अनुभव है. वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से भी जुड़ी रही हैं.
आर.के. सिन्हा की पहचान केवल कारोबारी और राजनेता के तौर पर नहीं थी. उनकी रुचि सामाजिक कार्यों और जैविक खेती में भी थी. उन्होंने विष मुक्त आहार यानी कीटनाशक मुक्त खेती को बढ़ावा देने की पहल की थी. इसके तहत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और देहरादून में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पारंपरिक तरीकों से खेती की गतिविधियां संचालित की गईं.
इसके अलावा दहेज मुक्त सामूहिक विवाह, मंदिर निर्माण, सार्वजनिक पुस्तकालय, मुफ्त एंबुलेंस सेवा और आपदा राहत जैसे सामाजिक कार्यों में भी उनकी भूमिका रही.
पत्रकारिता से कारोबार और फिर संसद तक का सफर
बिहार के बक्सर में 22 सितंबर 1951 को जन्मे रविंद्र किशोर सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी. अपराध और राजनीतिक रिपोर्टिंग के क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्हें महज 250 रुपये महीने का वेतन मिलता था. इसी दौर में उन्होंने समाज और देश की परिस्थितियों को करीब से समझा.
वर्ष 1974 में उन्होंने पटना से Security and Intelligence Services यानी SIS की नींव रखी. इसकी शुरुआत पूर्व सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की सोच के साथ हुई थी. धीरे-धीरे कंपनी ने निजी सुरक्षा सेवाओं से आगे बढ़कर फैसिलिटी मैनेजमेंट और कैश लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी विस्तार किया. आज SIS Group भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर तक कारोबार करता है.
कारोबार के बाद आर.के. सिन्हा ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और 2014 में बिहार से राज्यसभा सांसद चुने गए. उनका संसदीय कार्यकाल 2014 से 2020 तक रहा.


