जोहार लाइव ब्यूरो
रांची: झारखंड में डायन-बिसाही के नाम पर अंधविश्वास किस हद तक खतरनाक हो सकता है, इसका एक खौफनाक मामला सिमडेगा जिले से सामने आया था. यहां डायन बताकर एक बुजुर्ग दंपती की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इतना ही नहीं, आरोपियों ने परिवार के अन्य सदस्यों को कमरे में बंद कर घर और खलिहान में आग लगा दी थी. इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे तीन दोषियों को झारखंड हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है.
हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने उनकी आपराधिक अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने 6 नवंबर 2026 को यह फैसला सुनाया. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों की गवाही भरोसेमंद है और मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य उनकी बातों की पुष्टि करते हैं.
क्या थी पूरी घटना?
मामला 13 दिसंबर 2016 का है. सिमडेगा के बानो थाना क्षेत्र के टेम्बरो गांव के गंजहुटोली में आरोपियों ने भोल सिंह के परिवार को निशाना बनाया था. अभियोजन के अनुसार, तीनों आरोपी कुल्हाड़ी लेकर पहले शाम करीब पांच बजे पहुंचे और भोल सिंह के छोटे भाई बुटरू सिंह तथा उसकी पत्नी बिमला देवी को मारने की धमकी दी.
आरोपियों का कहना था कि दोनों डायन-बिसाही करते हैं, जिसके कारण उनके परिवार के लोग बीमार पड़ रहे हैं. शाम करीब सात बजे आरोपी दोबारा पहुंचे. खतरा भांपकर बुटरू सिंह और उसकी पत्नी बच्चों के साथ घर के पिछले दरवाजे से भाग निकले. इसके बाद आरोपियों ने भोल सिंह, उसकी पत्नी और बेटे को एक कमरे में बंद कर दिया. वहीं, उसके पिता लोहड़ा सिंह और मां चोरठी देवी को बाहर निकालकर बेरहमी से पीटा और आग के हवाले कर दिया. इस घटना में दोनों की मौत हो गई. आरोपियों ने खलिहान में रखी धान की फसल में भी आग लगा दी थी.
14 में से पांच गवाह हुए थे पक्षद्रोही
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 14 गवाह पेश किए थे. इनमें पांच गवाह पक्षद्रोही घोषित हो गए थे। हालांकि, भोल सिंह और उसके बेटे हीरा सिंह की गवाही अदालत में अहम साबित हुई. मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों मृतकों के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई थी. जांच के दौरान शंकर सिंह (मंगरू सिंह के पुत्र) के घर से कुल्हाड़ी भी बरामद की गई थी. हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में इस हथियार पर मृतक लोहड़ा सिंह के खून के निशान मिले थे.
2018 में मिली थी उम्रकैद, अब हाईकोर्ट से भी झटका
सिमडेगा के अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम ने 23 मई 2018 को विजय सिंह, शंकर सिंह उर्फ बुधु और एक अन्य शंकर सिंह को हत्या, घर में घुसकर अपराध करने, साक्ष्य मिटाने, आगजनी, धमकी और डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था. हत्या के मामले में तीनों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. प्रत्येक दोषी को पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था.दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों अपीलों में कोई मेरिट नहीं पाते हुए उन्हें खारिज कर दिया। फैसले के समय तीनों दोषी जेल में थे.


