धनबाद। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी तीन दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उन्होंने 3 नवंबर से धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आंदोलन शुरू किया है. विधायक की मांग है कि जिले में शिक्षकों के स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति की सूची सार्वजनिक की जाए तथा ग्रामीण और शहरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को समान किया जाए.
मीडिया से बातचीत में अरूप चटर्जी ने कहा कि पिछले एक साल से वे सरकारी स्कूलों में छात्र और शिक्षक के बीच असंतुलन दूर करने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए लगातार शिक्षा विभाग से शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है, लेकिन विभाग इस पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम है, वहां अधिक शिक्षक तैनात हैं, जबकि अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है. इसका खामियाजा ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है और उन्हें अपनी मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है.
तीन करोड़ रुपये लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि जिले में करीब तीन करोड़ रुपये लेकर बड़े पैमाने पर शिक्षकों का स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति की गई है. उनके अनुसार, शहरी क्षेत्र में शिक्षकों को 20 प्रतिशत एचआरए मिलता है. इसी वजह से कथित तौर पर पैसे देकर मनचाहे स्कूलों में पोस्टिंग कराई गई. इसका असर ग्रामीण स्कूलों पर पड़ा है, जहां पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई बाधित हो रही है और शैक्षणिक परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं.
अरूप चटर्जी ने कहा कि अगस्त में उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) शालिनी डुंगडुंग से मुलाकात कर आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी. इसमें पिछले एक वर्ष के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के अंतरजिला स्थानांतरण, नए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति और स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात का ब्योरा मांगा गया था. लेकिन अब तक उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.
डीसी और शिक्षा सचिव पर भी साधा निशाना
विधायक ने धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि इस मामले से कई बार उपायुक्त को अवगत कराया गया और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. शिक्षा सचिव को भी मामले की जानकारी दी गई, लेकिन वहां से भी पहल नहीं की गई.
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं चला रही है, लेकिन उनका लाभ निचले स्तर तक नहीं पहुंच रहा है. स्कूलों में बेंच-डेस्क उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करना भी जरूरी है.
बीपीएल दाखिले में गड़बड़ी का भी आरोप
अरूप चटर्जी ने निजी स्कूलों में आरटीई के तहत बीपीएल बच्चों के नामांकन में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों के लिए निर्धारित सीटें कथित तौर पर पैसे वाले लोगों को दे दी गईं. नामांकन में दूरी के मानक का भी पालन नहीं किया गया और अधिकतर दाखिले सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के बच्चों के हुए हैं. उन्होंने डीएसई कार्यालय में बिचौलियों के सक्रिय होने का भी आरोप लगाया.
विधायक की मांग है कि ग्रामीण और शहरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित किया जाए, शिक्षकों के स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति की पूरी सूची सार्वजनिक हो तथा आरटीई के तहत हुए नामांकन की व्यवस्थित जांच कराई जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं और ग्रामीण स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा.


