आनंद दत्त
बीते 2 नवंबर की देर शाम राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी थी. उन्होंने कहा था, मोदी जी, इस देश से झूठ बोलना बंद कीजिए. आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने और विदेशी मदद से ही प्रधानमंत्री बने हुए हैं. आपकी आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण में और समर्थन से है. विदेशी सोशल मीडिया पूरी तरह आपके साथ खड़ा है. मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं. कोई भी मंच, किसी भी समय. हिम्मत है तो आइए. आप नहीं आएंगे, क्योंकि जो मैं आपके बारे में जानता हूं, आप उससे डरते हैं.
ठीक अगले दिन यानी 3 नवंबर को उन्होंने एक गुलाब फूल ऑफर करते हुए कहा, 24 घंटे हो गए मोदी जी. मैंने आपको चैलेंज दिया है. आप कहते हो कि अपोजिशन देशद्रोही है. किसी भी स्टेज पे आप जगह चुनिए, डिबेट कीजिए मेरे साथ. देशद्रोही कौन है? विदेशी फोर्सेस का कनेक्शन किसका है? और किस प्रकार का कनेक्शन है? जल्दी से जल्दी कीजिए, डरिए मत.
उन्होंने आगे कहा, दोनों मिलेंगे, मीडिया होगी, देश के युवा होंगे, टेबल होगी, एक साइड आप बैठोगे, एक साइड मैं बैठूंगा. जिसको आप जज बनाना चाहते हो, बना दो. मोहन भागवत जी को बिठा दो, चलो. और फिर डिबेट करते हैं. सवाल उठेंगे फाइनेंशियल सिस्टम पर, फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर, US डील कैसे हुई, क्यों हुई, इतनी जल्दी क्यों हुई, सिर्फ आपने क्यों की, कैबिनेट को क्यों नहीं बताया, अडानी का केस बंद क्यों हुआ, एप्सटीन ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिसपे खुलकर डिस्कशन होगा. आ जाइए, डरिए मत. दूध का दूध, पानी का पानी कीजिए.
राहुल गांधी ने कहा, आप एलिगेशन लगाते हैं ना मेरे ऊपर, आ जाइए, सब साफ हो जाएगा. बाकी चीजों पे आपने डेफिमेशन केस लगा रखा है, शायद 45 डेफिमेशन केस मेरे ऊपर हैं. मगर इस डिबेट मामले पे, फॉरेन कनेक्शन पे आप डेफिमेशन नहीं लगा रहे हो. लगाइए ना, वहां भी डिस्कस करेंगे, खुल के. ये सब डिस्कस करते हैं, आइए. हैप्पी दिवाली, मोदी जी.
जवाब में पूर्व कांग्रेसी और अब असम से सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने भी एक वीडियो जारी किया. जिसमें उन्होंने पहले राहुल गांधी के गुलाब के ऑफर पर तंज करा.
हिमंता ने कहा, राहुल जी कल आपने एक वीडियो पोस्ट किया था. हाथ में आपका रोज (गुलाब) था और आप प्रधानमंत्री को हैप्पी दिवाली बोल रहे थे. राहुल जी रोज वैलेंटाइन डे में दिया जाता है. दिवाली में रोज नहीं दिया जाता. खैर आपको पता भी नहीं है. कहां भारत की संस्कृति के बारे में जानते हो.
यहां राहुल गांधी के सांस्कृतिक ज्ञान को चैलेंज करते हुए उन्होंने बीजेपी-संघ के विचारधारा के विपरीत वैलेंटाइन डे को वैलिडेट कर दिया. हालांकि अगर इसे थोड़ा ट्विस्ट करें या फिर सिक्के के पलट कर समझें, तो ये भी हो सकता है कि दिवाली पर गुलाब देने और उसकी सांस्कृतिक पहलू को वो निशाना बना रहे हों, लेकिन सामान्य समझ तो यही कह रही है कि उन्होंने जाने-अनजाने में ही सही, ये माना कि वैलेंटाइन डे में गुलाब दिया जाता है.
याद करिये, बीते 15 से अधिक सालों से 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे पर बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद ने जिस लाठी-डंडे से इसे विदेशी त्योहार बताते रहे, मनाने वालों को पीटते रहे, मॉल में तोड़फोड़ करते नजर आए, अब राहुल पर निशाना लगाने के लिए बीजेपी के एक फायर ब्रांड नेता को उसी वैलेंटाइन डे का सहारा लेना पड़ रहा है.
मामला यहीं नहीं रुकता रहा है, वैलेंटाइन डे को काउंटर करने के लिए कई सारे हिन्दूवादी संगठन इसी दिन को मातृ-पित्र पूजन दिवस के रूप में मनाने की अपील भी पूर्व में कर चुके हैं. शिवसेना जैसी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कहा कि जहां मिलेंगे बाबू सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना.
संघ के इंद्रेश कुमार ने जून 2017 में एक बयान में कहा था कि वैलेंटाइन डे जैसे पश्चिमी त्योहारों और प्रेम के व्यवसायीकरण की वजह से समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बलात्कार और अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं.
लेकिन कोई पर्व कैसे मनाया जाएगा, अब व्यक्ति या सांस्कृतिक व्यवस्था, परंपरा से ज्यादा बाजार तय करता है. हाल ही में करवा चौथ मनाया गया. उससे एक दिन पहले देश के कई हिस्सों में मौसम विभाग द्वारा बारिश की संभावना जताई गई. संभावित नुकसान को देखते हुए बाजार ने विशेषज्ञों से कहलवा दिया कि शुभ मुहुर्त दो दिन पहले भी है, खरीददारी की जा सकती है. अखबारों में खबर छपी. बाजार नुकसान से बच गया. बचना भी चाहिए था. त्योहार के साथ-साथ अर्थव्यवस्था का चलते रहना भी बेहद जरूरी है.
फिलहाल इस बात का आनंद लीजिये कि बीजेपी के एक चर्चित नेता ने वैलेंटाइन डे को वैलिडेट जरूर कर दिया है.
Also Read : दिमागी नक्सल एक नाकाम बयान, राहुल गांधी की चुनौती स्वीकारिये और बहस के लिए आइएः पीएम मोदी पर खड़गे का हमला


