अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 3 नवंबर 2026 को हुए मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. उनकी रिपब्लिकन पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों – प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) में अपना बहुमत गंवा दिया है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच उनके नेतृत्व और नीतियों के खिलाफ मतदाताओं के फैसले के रूप में देखा जा रहा है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा – अमेरिका के मध्यावधि चुनावों का नतीजा चौंकाने वाला रहा है. मतदाताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप को साफ तौर पर नकार दिया है. व्यक्तियों से इतर देखें तो ये नतीजे बताते हैं कि मध्यावधि चुनाव सरकार को जवाबदेह बनाए रखने का कितना बड़ा माध्यम हैं. ऐसे चुनाव सरकारों के अहंकार पर लगाम लगाते हैं और उन्हें महंगाई, बेरोजगारी, घटती आमदनी और आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों के प्रति सचेत रहने को मजबूर करते हैं. हमारे देश में मोदी सरकार जिस ONOE यानी ‘एक देश, एक चुनाव’ की वकालत कर रही है, उससे जवाबदेही तय करने वाला यह अहम माध्यम काफी हद तक कमजोर पड़ जाएगा. अमेरिका के चुनावों ने लोकतंत्र में संस्थागत संतुलन को भी बहाल किया है, जो किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र की बुनियाद है. भारत में 2014 से यह संतुलन लगातार बिगड़ा है.
भारतीय मीडिया इसे टैरिफ वार के दांव को बुरी तरह तरह से विफल होना बता रही है.
अमेरिका जाने का सपना देखने वाले मानते हैं कि H1-B वीजा को लेकर हो रही एकतरफा तानाशाही खत्म होगी. भारतीय टेक प्रोफेशनल्स मानते हैं कि ट्रंप की नीतियां उन्हें बेवजह निशाना बनाती है.
भारतीय विशेषज्ञ मानते हैं कि रूसी कच्चे तेल की खरीद पर भारत को 100% टैरिफ लगाने की धमकी और ईरान युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई—ने भारत को परेशान कर रखा था. कांग्रेस में हार के बाद ट्रंप अब ‘लेम डक’ (कमजोर) राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिससे वे भारत पर ऐसा दबाव नहीं बना पाएंगे.
वहीं भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद (मिशिगन) श्री थानेदार तीखा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि यह नतीजे डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अंधा समर्थन नहीं, बल्कि “डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से जनता का बढ़ता असंतोष” हैं. उन्होंने X पर संकेत दिया कि लोग बढ़ती महंगाई, ईरान युद्ध और ट्रंप प्रशासन के भीतर की अनिश्चितताओं से तंग आ चुके थे.
क्या है मिडटर्म चुनाव
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है. राष्ट्रपति के कार्यकाल के ठीक दो साल बाद होने वाले संसदीय चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन कहते हैं. इसमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों पर चुनाव होता है. इस चुनाव में राष्ट्रपति की कुर्सी दांव पर नहीं होती, लेकिन राजनीतिक दिशा तय करने के लिए अहम होते हैं.
सीनेट: डेमोक्रेट्स – 53 रिपब्लिकन – 41 हाउस: डेमोक्रेट्स – 214 रिपब्लिकन – 126
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