रांची : झारखंड में 15 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके सरकारी वाहनों का पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के माध्यम से व्यवस्थित निस्तारण किया जाएगा. इसके तहत पुराने, दुर्घटनाग्रस्त और लंबे समय से अनुपयोगी पड़े सरकारी वाहनों की पहचान कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्क्रैपिंग की जाएगी. परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की पहल की है.
परिवहन सचिव राजीव रंजन ने बुधवार को प्रोजेक्ट भवन, रांची में राज्यस्तरीय नोडल पदाधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग की प्रक्रिया भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की जाएगी. इसके लिए सभी विभागों को अपने यहां मौजूद पुराने और अनुपयोगी वाहनों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी.
दुर्घटनाग्रस्त और अनुपयोगी वाहनों पर विशेष ध्यान
बैठक में परिवहन सचिव ने कहा कि स्क्रैपिंग के लिए पात्र वाहनों की पहचान करना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. पुलिस थानों में दुर्घटनाग्रस्त और लंबे समय से पड़े वाहनों के अलावा दूसरे विभागों के ऐसे सरकारी वाहनों का भी निस्तारण किया जाएगा, जो मरम्मत योग्य नहीं हैं या जिनका इस्तेमाल व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है. इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा.
बैठक में MSTC और पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के प्रतिनिधियों ने सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी. अधिकारियों को MSTC और GeM पोर्टल पर पंजीकरण, वाहनों का विवरण अपलोड करने, नीलामी कराने और पंजीकृत सुविधा के माध्यम से वाहनों की स्क्रैपिंग कराने की प्रक्रिया समझाई गई. इसके साथ ही जरूरी दस्तावेजों, विभागीय जिम्मेदारियों और निर्धारित प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई.
सरकारी राजस्व और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
परिवहन सचिव ने कहा कि पुराने सरकारी वाहनों का निस्तारण केवल अनुपयोगी वाहनों को हटाने तक सीमित नहीं है. इससे संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने बताया कि स्क्रैपिंग से जुड़े वित्तीय और राजस्व संबंधी प्रावधानों का लाभ संबंधित विभागों को मिलेगा. इसके अलावा, स्क्रैपिंग के बाद परिवहन विभाग के माध्यम से देय कर की राशि सरकारी राजकोष में जमा होगी.
उन्होंने सभी विभागों के नोडल पदाधिकारियों को प्रक्रिया को गंभीरता से समझने और अपने-अपने विभागों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. किसी भी चरण में तकनीकी समस्या या संदेह होने पर परिवहन विभाग से परामर्श लेने को कहा गया.
बैठक में विभिन्न विभागों के नोडल पदाधिकारियों के साथ MSTC, GeM और पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के प्रतिनिधि मौजूद थे.
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