जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड में एक तरफ जहां मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी सोशल मीडिया के धार को और पैनी करने में लगी है. वहीं सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा इन दिनों फेस्टिव मूड में दिख रही है. वो आराम कर रही है. पार्टी के एक्स हैंडल को देखेंगे तो आखिरी पोस्ट 17 अक्टूबर को किया गया है. इससे पहले किसी दिन दो तो किसी दिन चार पोस्ट जरूर करती रही है.
वहीं बीजेपी झारखंड के एक्स हैंडल को अगर 17 अक्टूबर से ही देखेंगे, तो 3 नवंबर तक 500 से अधिक पोस्ट किए गए हैं. जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों से लेकर, अपने नेताओं के बयान, जेएमएम – कांग्रेस पर राजनीतिक हमला जैसे पोस्ट शामिल हैं.
वह भी तब, जब हाल ही में पार्टी के मुखिया हेमंत सोरेन नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट में हिस्सा भी लेने गए. यही नहीं, पार्टी के स्तर पर एमएमडीआर बिल और एसआईआर के खिलाफ राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम भी तय हुए हैं.
यहां तक कि हेमंत सोरेन के दिल्ली मे दिए गए बयान को भी अपने पार्टी के हैंडल से आम लोगों तक जेएमएम नहीं पहुंचा पाई.
यहां तक कि साथी दल कांग्रेस भी इन दिनों अपने सोशल मीडिया पर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करा रही है. पार्टी के नेता भी पहले के मुकाबले अधिक एक्टिव नजर आते हैं.
नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के एक कार्यकर्ता ने बताया, 6 से 7 लोग मिलकर चलाते हैं. लेकिन उन्हें पता नहीं है कि आखिर वो एक्टिव क्यों नहीं हैं. तंज कसते हुए ये बात उन्होंने जरूर कहा कि ये छह से सात लोग बहुत मेहनत कर लिए होंगे, इसलिए इन दिनों छुट्टी मनाने गए होंगे.
एक और कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले नॉन पेड वर्कर बहुत थे. वो बस पार्टी हित की सोचते थे और दिन रात काम करते थे. चुनाव के बाद इन नॉन पेड वर्करों को दरकिनार कर दिया गया. उनकी जगह पेड वर्कर आ गए हैं. पेड वर्कर तो समय और छुट्टी देखकर ही काम करेंगे न.
हालांकि ये बात ध्यान देनेवाली जरूर है कि बीते विधानसभा चुनाव में खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली और सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपए खर्च करनेवाली बीजेपी जेएमएम के इस छोटे से टीम का मुकाबला नहीं कर पाई थी. खासकर तब, जब जेएमएम स्थानीय भाषा में अपने लोगों के सोशल मीडिया पर संवाद करती थी.


