दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों और अन्य चर्चित हस्तियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया है. कोर्ट का मानना है कि खिलाड़ियों और मशहूर हस्तियों के जरिए लोगों तक पटाखा-मुक्त दिवाली का संदेश आसानी से पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए टीवी, अखबारों और दूसरे संचार माध्यमों पर अभियान चलाने की बात कही गई है.
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव सामने आया. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि समाज में लोकप्रिय और सम्मानित लोगों की मदद से लोगों को पटाखों के नुकसान के प्रति जागरूक किया जा सकता है.
विराट कोहली के जरिए लोगों तक पहुंचेगा संदेश
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों से संपर्क करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि क्रिकेटरों से वीडियो संदेश तैयार करने की अपील की जा सकती है, जिसमें वे लोगों से दिवाली पर पटाखे नहीं जलाने और त्योहार को रोशनी के साथ मनाने की अपील करें.
पीठ ने कहा कि दिवाली की खुशियां मनाने के ऐसे तरीके होने चाहिए, जिनसे दूसरों को परेशानी न हो. खासकर बच्चों को पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में समझाना जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस अभियान में शिक्षा विभाग को भी शामिल करने की बात कही. अदालत के अनुसार, स्कूलों में बच्चों को वायु प्रदूषण और पटाखों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया जाना चाहिए. जागरूक बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी पटाखे नहीं जलाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
पीठ ने कहा कि नई पीढ़ी को सही जानकारी देकर इस दिशा में बदलाव लाया जा सकता है. बच्चों को दिवाली मनाने के लिए पटाखों की जरूरत नहीं है.
पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया. कोर्ट ने अधिकारियों को आगाह किया कि यदि प्रतिबंधों और निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ तो सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.
सुनवाई के दौरान बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार लोगों के साथ-साथ पक्षियों और जानवरों पर भी प्रदूषण के असर का जिक्र किया गया. अदालत ने कहा कि त्योहार मनाने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और दूसरों की परेशानियों का भी ध्यान रखना जरूरी है.
हर साल प्रदूषण से 20.1 लाख से अधिक मौतों का दावा
सुनवाई में अदालत की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी उत्तरा बब्बर ने वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के आंकड़े पेश किए. उन्होंने स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर साल 20.1 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है. इनमें पांच साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत बताई गई.
उन्होंने बताया कि पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचने के बाद रक्त प्रवाह में भी शामिल हो सकते हैं. इससे हृदय रोग, कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है.
सुनवाई में ग्रीन पटाखों से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी उठा. एमिकस क्यूरी ने बताया कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं हैं. वर्ष 2025 में दिवाली के दौरान इनके इस्तेमाल की सीमित छूट के बाद पीएम 2.5 का स्तर तेजी से बढ़ा था.
उन्होंने बाजार में ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखे बेचे जाने और क्यूआर कोड में गड़बड़ी की शिकायतों का भी उल्लेख किया. इस पर कोर्ट ने अधिकारियों से पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा.


