मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया गया था. इस प्रदर्शन को आईसा और कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों के द्वारा बुलाई गई थी. दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी. नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी गई और DMRC को 11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद करना पड़ा. प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पूरा इलाका किले में बदल चुका था, और दोपहर तक AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई नेता हिरासत में ले लिए गए.
किले में बदला दिल्ली
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली स्टेशन पर लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई.
हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर सिर्फ इंटरचेंज चालू रखा गया. यानी रोज इन रास्तों से दफ्तर जाने वाले हजारों लोगों को या तो पैदल चलना पड़ा या दूसरा रास्ता ढूंढना पड़ा.
इसके अलावा जंतर-मंतर पर CAPF और RAF के जवान, बैरिकेडिंग और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात रहे. कनॉट प्लेस, पटेल चौक, GPO, टॉल्स्टॉय मार्ग और संसद मार्ग पर ट्रैफिक भी रोका गया. डीसीपी सचिन शर्मा ने साफ कहा कि प्रदर्शन और धरने की इजाजत नहीं है और लोगों से इलाके में न आने की अपील की. इसके बावजूद AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज जंतर-मंतर पहुंचे और कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिए गए. हिरासत से पहले उन्होंने कहा कि वे मेट्रो में 11 रुपए और ऑटो में 80 रुपए खर्च करके अकेले आए हैं, तो बाकी लोग भी आ सकते हैं.
नागरिकों के नाम बुलाया गया था प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे का प्रदर्शन AISA, राजद सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने बुलाया था. इसका ऐलान एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ. AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का कहना है कि आयोजकों ने संसद मार्ग थाने को पहले से जानकारी दी थी, फिर भी पुलिस ने अनुमति नहीं दी. SFI और DYFI भी जुटान में शामिल थे. AAP के नेताओं ने लोगों से पहुंचने की अपील की, और NSUI व यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के आने की बात थी. प्रशांत भूषण ने इसे “नागरिकों का प्रदर्शन” बताया और लोगों से पार्टी या संगठन के पोस्टर न लाने को कहा.
इस पूरे मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का नाम भी खूब चर्चा में है, लेकिन दिल्ली के प्रदर्शन का कॉल उसका नहीं है. CJP की शुरुआत 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने ऑनलाइन व्यंग्य के रूप में की थी. दिपके आज शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में “जेल भरो आंदोलन” करने वाले हैं, जिसमें लोग खुद गिरफ्तारी देते हैं. मुंबई पुलिस ने इसकी भी इजाजत नहीं दी. दिपके के मरीन ड्राइव पर थोड़ी देर हिरासत में रखे जाने की खबर आई, जिसे CJP ने फर्जी बताया है. गायक विशाल ददलानी ने भी आंदोलन में शामिल होने की बात कही है.

दिपके की तीन मांगें हैं: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उन पर आपराधिक कार्रवाई, SIR पर रोक और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट की बहाली, और 2023 के चुनाव आयोग कानून की वापसी. वे कह चुके हैं कि अगर कुमार इस्तीफा नहीं देते तो CJP का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन अक्टूबर के आखिर में होगा.
विरोध की वजह
यह पूरा विवाद इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद गरमाया. रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों पर रिकॉर्ड में आपत्ति जताई. दोनों ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर आयोग के कामकाज पर चिंता भी जताई. विपक्ष का आरोप है कि इन आपत्तियों को दरकिनार किया गया। चुनाव आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय संस्था में आंतरिक मतभेद होते हैं और SIR पर अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए. ये आरोप किसी अदालत या चुनाव प्राधिकरण के निष्कर्ष नहीं हैं.
SIR यानी वोटर लिस्ट की गहन जांच, जिसमें मतदाताओं से दस्तावेज देकर अपनी पात्रता साबित करवाई जाती है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इससे बड़े पैमाने पर वोट कटे हैं.
ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 से देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं. उनकी नियुक्ति पर पहले भी सवाल उठे थे. जिस समिति ने उन्हें चुना, उसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने असहमति नोट दिया था. इसी वजह से CJP जैसे संगठन 2023 के उस कानून की वापसी मांग रहे हैं, जिसने चयन समिति से CJI को हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को रखा.
जंतर-मंतर पर यह इस मुद्दे का दूसरा बड़ा जमावड़ा है. 25 सितंबर के प्रदर्शन में भी नेहा बोरा, दीपांकर भट्टाचार्य और योगेंद्र यादव समेत कई लोग हिरासत में लिए गए थे.

