जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम): यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) में सलिल कुमार नाग ने सितंबर 2026 में निदेशक (तकनीकी) का पदभार संभाल लिया है. वे इससे पहले हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) में जनरल मैनेजर (माइनिंग) थे. देश को 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य पाना है और UCIL ने इसके लिए परमाणु इंधन की आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभाने की बात कही है. यानी उत्पादन बढ़ाने का दबाव है. दूसरी तरफ झारखंड की इन खदानों में मजदूरों की सुरक्षा का सवाल पुराना है. नाग को इन दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा.
नाग ने 1995 में HCL में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (माइनिंग) के तौर पर शुरुआत की थी. उन्हें अंडरग्राउंड मेटल माइनिंग का लंबा अनुभव है और वे कोलिहान कॉपर माइन में माइन प्लानिंग का काम भी देख चुके हैं. उनके नाम की सिफारिश जून 2026 में PESB ने UCIL के निदेशक (तकनीकी) पद के लिए की थी.
निदेशक के पास क्या जिम्मेदारी होती है?
इस पद पर बैठा अधिकारी कंपनी का तकनीकी विभाग संभालता है. खदानों और प्लांटों का संचालन और प्रोजेक्ट्स को पूरा करना उसी की जिम्मेदारी होती है. वह कंपनी के बोर्ड का सदस्य होता है और CMD को रिपोर्ट करता है. UCIL झारखंड में छह अंडरग्राउंड खदानें (बागजाता, जादूगोड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, तुरामडीह, मोहुलडीह) और एक ओपन-पिट खदान बांदूहुरांग चलाती है. इनका अयस्क जादूगोड़ा और तुरामडीह के दो प्रोसेसिंग प्लांट में जाता है. इन सबका तकनीकी कामकाज अब नाग की देखरेख में रहेगा.
उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
15 अगस्त को जादूगोड़ा में UCIL के CMD डॉ. के. आनंद राव ने बताया कि बांदूहुरांग ओपनकास्ट खदान के लिए टेंडर निकाला गया है. उन्होंने इसे UCIL की लाइफलाइन कहा. कंपनी आंध्र प्रदेश के तुम्मलपल्ले प्लांट का विस्तार कर रही है और राजस्थान के सीकर में प्रस्तावित रोहिल खदान पर भी काम आगे बढ़ा रही है. तुरामडीह खदान की क्षमता 0.45 मिलियन टन सालाना से बढ़ाकर 0.75 मिलियन टन करने का प्रस्ताव भी है.
नाग के पुराने संस्थान से भी एक कड़ी जुड़ती है. HCL के CMD के मुताबिक UCIL झारखंड में रिकवरी प्लांट लगाकर HCL के तांबे के टेलिंग से यूरेनियम निकालेगा.
सुरक्षा की परीक्षा
खदानों का विस्तार बढ़ेगा तो सुरक्षा की परीक्षा भी बढ़ेगी. अगस्त 2022 में बागजाता खदान में विस्फोट के बाद सड़क साफ कर रहे 40 साल के अस्थायी मजदूर फकीर हांसदा पर पत्थर गिर गया और उनकी मौत हो गई. ग्रामीणों के मुताबिक यह एक हफ्ते में दूसरी मौत थी. परिजनों ने नौकरी और मुआवजे की मांग की.
रेडिएशन को लेकर भी विवाद पुराना है. कुछ अध्ययनों में टेलिंग तालाबों के पास बसे ज्यादातर आदिवासी गांवों में जन्मजात विकृति और कैंसर जैसी बीमारियों के मामले ज्यादा बताए गए. UCIL इन दावों को नहीं मानता. उसका कहना है कि इलाके की बीमारियों की वजह रेडिएशन नहीं, बल्कि कुपोषण, मलेरिया और गंदगी जैसे कारण हैं.
तांबे और यूरेनियम की खदानों की चुनौतियां अलग हैं. नाग के सामने पहला काम खदानों की सुरक्षा व्यवस्था और मशीनरी की स्थिति को परखना होगा. साथ ही उन्हें विस्तार परियोजनाओं की रफ्तार बनाए रखनी है. उत्पादन के लक्ष्य के साथ मजदूरों और आसपास के ग्रामीणों का भरोसा बनाए रखना भी उनकी बड़ी परीक्षा होगी.
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