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    Home»जोहार ब्रेकिंग»CEC ने ईसीआई को बनाया ‘रबर स्टैंप’ या खुद कर लिया हाइजैक? चुनाव आयोग के अंदरूनी कलह पर कांग्रेस का बड़ा हमला
    जोहार ब्रेकिंग

    CEC ने ईसीआई को बनाया ‘रबर स्टैंप’ या खुद कर लिया हाइजैक? चुनाव आयोग के अंदरूनी कलह पर कांग्रेस का बड़ा हमला

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkSeptember 23, 2026Updated:September 23, 2026No Comments3 Mins Read0
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    देश के चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और इसके भीतर कथित अंदरूनी कलह को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है. कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है.

    कांग्रेस नेता और AICC Law, RTI & HR Department के चेयरमैन अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया है कि देश में एक तरफ संवैधानिक संस्थाओं पर बाहरी दबाव का भारी बुलडोजर चल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग के भीतर एक आंतरिक बुलडोजर सक्रिय है, जिसने पूरी संस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

    सिंघवी ने कहा कि यह मामला सिर्फ चुनाव आयोग के प्रशासनिक कामकाज का नहीं, बल्कि देश के संपूर्ण संवैधानिक स्वास्थ्य से जुड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने साथी चुनाव आयुक्तों (ECs) को महत्वपूर्ण फैसलों से बेदखल कर दिया है और आयोग को पूरी तरह अपने एकाधिकार में ले लिया है.

    कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने चुनाव आयोग को हाइजैक करके अपने सहकर्मियों को काम करने से अलग कर दिया. उन्होंने अपने ही ईसी (ECs) को दरकिनार कर दिया है. यह संस्था के भीतर चल रहे आंतरिक बुलडोजर का सबसे स्पष्ट उदाहरण है.”

    क्या है पूरा मामला

    यह पूरा भूचाल ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी एक विशेष जांच रिपोर्ट के बाद आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कामकाज और कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इन आपत्तियों में मुख्य रूप से फॉर्म-6 में बदलाव की प्रक्रिया, वोटर डेटाबेस का केंद्रीकरण, जिला निर्वाचन अधिकारियों (EROs) की आईटी एक्सेस और चुनाव आयोग के आईटी डिवीजन का आंतरिक कामकाज जैसे मुद्दे शामिल थे.

    रिपोर्ट में यह गंभीर सवाल उठाया गया था कि क्या इन फैसलों को लेने में सामूहिक सहमति की अनदेखी की गई और वोटर डेटाबेस पर वास्तविक नियंत्रण किसका था.

    सिंघवी ने 1995 के सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) अन्य आयुक्तों से वरिष्ठ या सर्वोपरि नहीं होते, बल्कि वे ‘First among equals’ यानी ‘बराबरों में प्रथम’ होते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां दर्ज थीं, तो आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की धज्जियां क्यों उड़ाई गईं?

    दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली और मतभेदों से जुड़ी इन खबरों को सिरे से खारिज किया है. आयोग का कहना है कि SIR समेत तमाम बड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की आपसी सहमति और पूर्ण मंजूरी के बाद ही लिए गए हैं. हालांकि, विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि इस अंदरूनी कलह पर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि देश की इस सर्वोच्च निष्पक्ष संस्था की विश्वसनीयता पर कोई आंच न आए.

    Also Read : चुनाव आयुक्तों पर मतभेद की खबरों के बीच ज्ञानेश कुमार की सफाई, बोले- ‘सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

    AICC Congress ECI Election Commission of India कांग्रेस चुनाव आयोग
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