मैं 2009 में सांसद बनने के बाद आज तक किसी सचिव के दफ्तर नहीं गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के एक पुराने दावे पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अब सीधा पलटवार किया है. दुबे ने कहा है कि अगर गर्ग के दावे में दम है तो वह मुलाकात का सबूत सामने रखें. मामला इतना बढ़ गया है कि दुबे ने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दायर करने की बात कही है और सार्वजनिक माफी की मांग की है.
गर्ग ने एक हालिया पॉडकास्ट में दावा किया था कि दुबे एक बार उनके दफ्तर आए थे और उन्होंने एलआईसी चेयरमैन से अपने किसी काम को कराने के लिए कहा था. गर्ग के मुताबिक, उस समय बात तबादलों और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े काम की हुई थी. गर्ग ने कहा कि उन्होंने इस तरह का काम करने से इनकार कर दिया था. दूसरी तरफ दुबे इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं.
दुबे बोले- सबूत दिखाइए, मैं सचिव के दफ्तर गया ही नहीं
निशिकांत दुबे ने कहा कि 2009 में सांसद बनने के बाद से उन्होंने केंद्र सरकार के किसी सचिव के दफ्तर का दौरा नहीं किया है. अपने बयान में उन्होंने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का सचिव सांसद से नीचे के स्तर पर होता है.
दुबे ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी अधिकारी के तबादले या पोस्टिंग के लिए पत्र नहीं लिखा. उन्होंने गर्ग और उनके करीबियों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई पत्र या उनके किसी सरकारी दफ्तर में जाने का रिकॉर्ड है तो उसे सामने लाया जाए.
दुबे ने अपने एक्स पोस्ट में गर्ग पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस किया है. उनका कहना है कि गर्ग को अपने दावे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी, वरना मामला कानूनी तौर पर आगे बढ़ेगा.
गर्ग का दावा- एलआईसी चेयरमैन से ‘काम’ कराने आए थे दुबे
सुभाष गर्ग ने शालिनी कपूर तिवारी के साथ पॉडकास्ट में 2018 के दौर की एक कथित मुलाकात का जिक्र किया. उनके मुताबिक, दुबे उनके दफ्तर आए थे और उनसे एलआईसी चेयरमैन से “मेरा काम” कराने को कहा था.
गर्ग ने कहा कि एलआईसी सीधे उनके विभाग के अधीन नहीं थी और उस समय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में राजीव कुमार की जिम्मेदारी थी. गर्ग के मुताबिक, जब उन्होंने दुबे से पूछा कि आखिर कौन सा काम है, तो जवाब मिला कि मामला तबादलों और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है.
गर्ग का कहना है कि उन्होंने इस तरह का काम करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि दुबे ने पहले सरकार को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया था, जिसे कथित तौर पर कूड़ेदान में डाल दिया गया था.
आयुष्मान भारत की बैठक का भी किया जिक्र
गर्ग ने इसी बातचीत में 2018-19 के बजट से जुड़ी एक स्टैंडिंग कमेटी की बैठक का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना का फैसला देर से हुआ था और बजट में उसके लिए अलग हेड समय पर नहीं बनाया जा सका था.
गर्ग के अनुसार, कमेटी की बैठक में उन्होंने सचिव के तौर पर बताया था कि अलग हेड बाद में बनाया जाएगा और फिलहाल दूसरे हेड के तहत व्यवस्था की जाएगी. उनका दावा है कि दफ्तर लौटने के करीब 10 मिनट बाद पीएमओ से फोन आया और उनसे पूछा गया कि उन्होंने बैठक में क्या कहा था. गर्ग ने दावा किया कि उन्हें बाद में पता चला कि निशिकांत दुबे ने इस मामले को लेकर पीएमओ में शिकायत की थी.
विवाद की जड़ 2018 की चिट्ठी तक जाती है
यह विवाद अचानक सामने नहीं आया है. इसकी पृष्ठभूमि 2018 तक जाती है. उस समय सुभाष गर्ग आर्थिक मामलों के सचिव थे. 3 मार्च 2018 को निशिकांत दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर गर्ग की आर्थिक नीतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे.
दुबे ने उस पत्र में वित्तीय घाटे पर जरूरत से ज्यादा जोर देने, FRBM व्यवस्था में अधिक लचीलापन रखने, सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्च को प्राथमिकता देने की बात कही थी. उन्होंने Bharatmala, Sagarmala, औद्योगिक कॉरिडोर, रेलवे, UDAN, एयरपोर्ट और हाईवे जैसे प्रोजेक्टों के लिए सरकारी पूंजीगत खर्च को जरूरी बताया था.
इस चिट्ठी में दुबे ने गर्ग के साथ अपने “interactions” का भी उल्लेख किया था. हालांकि, इस शब्द से दोनों के बीच संपर्क या बातचीत का पता चलता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि दुबे गर्ग के सरकारी दफ्तर गए थे.
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