पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में आयोजित कुड़मी करमा महोत्सव सह महाजुटान रैली में शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद झारखंड की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है. डुमरी विधायक और JLKM नेता जयराम महतो ने 21 सितंबर को एक्स पर पोस्ट कर शुभेंदु अधिकारी को जवाब दिया है.
उन्होंने कहा कि अगर टिप्पणी किसी विधायक या सांसद की ओर से आती तो वह उसे नजरअंदाज कर देते, लेकिन शुभेंदु अधिकारी एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनके बयान का जवाब तथ्यों और तर्कों के साथ दिया जाएगा.
थोड़ा इंतजार कीजिए
जयराम महतो ने एक्स पर शुभेंदु अधिकारी को संबोधित करते हुए लिखा, “माननीय मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी जी, आपको जोहार. अगर कोई विधायक या सांसद टिप्पणी करता तो मैं इग्नोर कर देता, लेकिन आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए इस क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर मिलेगी, वो भी तथ्यों एवं तर्कों के साथ. थोड़ा इंतजार कीजिए.”
जयराम के इस बयान से संकेत मिलता है कि वह पुरुलिया की रैली में शुभेंदु अधिकारी की ओर से दिए गए बयान का विस्तृत जवाब देने वाले हैं. हालांकि, उन्होंने अभी यह नहीं बताया है कि वह किन तथ्यों और मुद्दों के आधार पर अपनी बात रखेंगे.
पुरुलिया रैली में क्या बोले थे शुभेंदु अधिकारी
दरअसल, पुरुलिया में आयोजित कुड़मी करमा महोत्सव सह महाजुटान रैली में शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए जयराम महतो पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि कुड़मी समाज को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है, जो उसकी मांगों को राजनीतिक और संवैधानिक मंच पर मजबूती से रख सके. न कि केवल चुनावी रैली तक सीमित रहे.
शुभेंदु अधिकारी ने रैली के आयोजक अजीत महतो के हवाले से जयराम महतो के उस आरोप का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने रैली के पीछे बीजेपी के पैसे होने की बात कही थी. उन्होंने कुड़मी समाज के युवाओं से ऐसे बयानों से भ्रमित नहीं होने की अपील की थी.
कुड़माली भाषा और ST दर्जे का मुद्दा
रैली में शुभेंदु अधिकारी ने कुड़माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इस मांग को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखा जा रहा है और इस दिशा में सकारात्मक पहल जारी है.
वहीं, जयराम महतो पहले ही इस रैली को लेकर सवाल उठा चुके थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि करम महोत्सव और महाजुटान के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी का राजनीतिक हाथ है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि अगर यह विशुद्ध रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है. अब शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद जयराम महतो ने तथ्यों और तर्कों के साथ जवाब देने की बात कही है.
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