पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुर्मी समाज के करम महाजुटान के दौरान मुख्यमंत्री सुभेंदू अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान कुर्मी आंदोलन को लेकर दर्ज किए गए सभी केस वापस लिए जाएंगे.
अधिकारी ने कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का भरोसा भी दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कुर्मी समाज से किए गए सभी वादों को पूरा करेगी.
कुर्मी समाज के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान
सुभेंदू अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस साल के बजट में कुर्मी समाज के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. आने वाले दिनों में इस राशि को और बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कुर्मी डेवलपमेंट बोर्ड को भी जल्द दोबारा सक्रिय करने की बात कही.
मुख्यमंत्री ने पिछली टीएमसी सरकार पर कुर्मी समाज को बांटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार समाज को एकजुट रखने और उसके विकास के लिए काम करेगी.
सुदेश महतो बोले- तीन राज्यों में मजबूत करनी है जड़
कार्यक्रम में झारखंड के आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने भी समाज की एकजुटता और तीन राज्यों में उसके विस्तार की बात कही. उन्होंने कहा कि बंगाल, झारखंड और ओडिशा के लोग एकजुट क्यों हुए हैं, इसे लेकर किसी को चिंतित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं यहां सुभेंदु बाबू का आशीर्वाद लेने आया हूं.”
सुदेश महतो ने कहा कि समाज का एक साथ आना और मिलकर कार्यक्रम करना उसकी मजबूती की निशानी है. उन्होंने कहा कि समाज की एकता, सामाजिक-आर्थिक दायरा बढ़ाने और समाज के बारे में चिंतन करने से मानभूम और जंगलमहल का राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है.
सुदेश महतो ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक दायरा बढ़ाने के लिए बंगाल, झारखंड और ओडिशा तीनों राज्यों में अपनी जड़ मजबूत करनी होगी. उन्होंने करम पर्व को समाज की एकता और भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसी एकता को आगे बढ़ाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि समाज अलग-अलग वर्गों और राज्यों में बंटा जरूर है, लेकिन उसकी सामाजिक जड़ एक है. सुदेश महतो ने कहा, “हम एक साथ रहने वाला समाज हैं. हमारा गांव किसी से अलग नहीं है. ST, SC और OBC एक साथ रहते हैं. हमारा मूल समाज एक है.”
उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने की क्षमता रखने वाला समाज ही आगे बढ़ सकता है.
ST दर्जे की मांग को लेकर हुआ था आंदोलन
कुर्मी समाज ने टीएमसी सरकार के दौरान अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में आंदोलन किया था. इस दौरान सड़क और रेलवे जाम भी किए गए थे. कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना भी समाज की प्रमुख मांगों में रहा है.
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