जोहार लाइव ब्यूरो
कोयला खदान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) में वर्ष 2016 के दौरान कथित फर्जी पेंशन दावों के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान के मामले में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), धनबाद ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्राथमिकी में CMPFO के चार अधिकारियों के अलावा अन्य अज्ञात अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है. सीबीआई द्वारा दर्ज केस मुताबिक मामले की शिकायत CMPFO, धनबाद के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) ने की थी.CVO की शिकायत में CMPFO के तत्कालीन अधिकारियों पर रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर फर्जी पेंशन दावों को मंजूरी देने का आरोप लगाया गया है.
142 फर्जी पेंशन दावों को प्रोसेस करने का आरोप
दर्ज केस में आरोप है कि CMPF क्षेत्रीय कार्यालय धनबाद में मार्च 2016 से सितंबर 2016 के बीच तत्कालीन डीलिंग असिटेंट के तौर पर काम कर रहे अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया.इस दौरान 142 कथित फर्जी पेंशन दावों को प्रोसेस किया गया. इन दावों के आधार पर 3 करोड़ 64 लाख 48 हजार 52 रुपये की पेंशन बकाया राशि का गलत भुगतान किए जाने का आरोप है. इसके अतिरिक्त संबंधित लाभार्थियों को मासिक पेंशन का भुगतान भी किए जाने की बात केस में दर्ज है
सीबीआई ने इस मामले में प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में जालसाजी से जुड़े अपराध का मामला पाया है. केस में आईपीसी की धारा 120-B के साथ 420, 467, 468 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(d) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
चार अधिकारियों के नाम केस में
सीबीआई ने जिन अधिकारियों को नामजद किया है, उनमें अचिंत्य कुमार, सेक्शन ऑफिसर, CMPF मुख्यालय धनबाद; दीप कुमार, सेक्शन ऑफिसर, CMPFO के तालचर रीजनल ऑफिस, ओडिशा, जो कथित अवधि में CMPF धनबाद में सीनियर SSA के रूप में कार्यरत थे.अजय कुमार सिन्हा, सेक्शन ऑफिसर, CMPF मुख्यालय धनबाद; और मनजीत कुमार, सीनियर SSA, CMPF मुख्यालय धनबाद शामिल हैं. इनके अलावा CMPFO के अन्य अज्ञात अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है.
फर्जी दावों के पीछे मिलीभगत की जांच
सीबीआई की केस में इन अधिकारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश का मामला सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि 142 पेंशन दावों को किस आधार पर तैयार और स्वीकृत किया गया, संबंधित रिकॉर्ड में किस स्तर पर बदलाव किए गए और भुगतान की प्रक्रिया में कौन-कौन अधिकारी या अन्य लोग शामिल थे.
मामले में सीबीआई ने यह भी उल्लेख किया है कि आरोपित अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संज्ञेय अपराध बनता है.
सीबीआई ने शुरू की जांच
केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है. प्राथमिकी में जांच अधिकारी के रूप में इंस्पेक्टर संदीप सिंह को नामित किया गया है.
अब जांच का मुख्य फोकस कथित 142 फर्जी पेंशन दावों के मूल रिकॉर्ड, पेंशन भुगतान की प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और सरकारी राशि के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान पर रहने की संभावना है. सीबीआई यह भी जांच करेगी कि कथित तौर पर 3.64 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के भुगतान में किसी संगठित नेटवर्क या अन्य अधिकारियों की भूमिका थी या नहीं. हालांकि, इन पहलुओं पर केस में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है और इन्हें जांच के दौरान स्पष्ट किया जाना है.


