किसलय शानू
रांची. झारखंड ATS की जांच जिस 50 लाख रुपये कैश की बरामदगी से शुरू हुई, उसकी कड़ी जेल में बंद विकास तिवारी उर्फ विकास नाथ तिवारी तक पहुंची. 12 अगस्त 2024 को पटना रेलवे जंक्शन पर वंदे भारत एक्सप्रेस से उतरते समय बजरंग कुमार ठाकुर को RPF/GRP ने 50 लाख रुपये नकद के साथ पकड़ा था. उसके पास तीन मोबाइल फोन भी मिले थे. इसके बाद ATS ने मामले की जांच शुरू की और आयकर विभाग से बरामद रकम की जांच कराने के साथ आरोपी से पूछताछ की.
वंदे भारत से पटना पहुंचा 50 लाख रुपये का कैश
ATS की केस डायरी के मुताबिक, 12 अगस्त 2024 को सूचना मिली कि रांची से पटना जाने वाली वंदे भारत ट्रेन से उतरने वाले एक व्यक्ति के पास भारी मात्रा में नकदी है. पटना रेलवे जंक्शन पर बजरंग कुमार ठाकुर को पकड़ा गया और उसके पास से 50 लाख रुपये तथा तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए.
रेलवे पुलिस ने रकम और मोबाइल फोन की जब्ती की और आयकर विभाग को इसकी जानकारी दी. ATS के अधिकारी भी पटना पहुंचे और बरामद रकम के स्रोत तथा उसके संभावित इस्तेमाल की जांच शुरू की.
आयकर जांच में रकम का वैध स्रोत नहीं मिला
जांच के दौरान ATS ने आयकर विभाग से भी जानकारी मांगी. 16 अगस्त 2024 को आयकर विभाग, पटना की ओर से दी गई जानकारी को ATS ने अपनी जांच में महत्वपूर्ण माना.
जांच एजेंसी के अनुसार, बजरंग कुमार ठाकुर बरामद 50 लाख रुपये के संबंध में कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका. आयकर रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि उसने पहले कभी ITR दाखिल नहीं किया था.
यहीं से जांच का फोकस सिर्फ कैश की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा. ATS ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और किसे पहुंचाई जानी थी.
पूछताछ में विकास तिवारी का नाम सामने आने का दावा
ATS की जांच के अनुसार, बजरंग कुमार ठाकुर से पूछताछ के दौरान बरामद 50 लाख रुपये को विकास तिवारी से जोड़ने वाली जानकारी मिली.
जांच एजेंसी का दावा है कि पूछताछ में बजरंग ने कहा कि रकम विकास तिवारी की थी और इसे गैंग के लोगों ने कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और अन्य कारोबारियों से वसूली गई रकम के रूप में जमा किया था.
बजरंग के बयान के मुताबिक, वह और पवन कुमार ठाकुर इस रकम को वंदे भारत एक्सप्रेस से पटना लेकर जा रहे थे. पटना में RPF ने उसे पकड़ लिया, जबकि पवन कुमार ठाकुर मौके से फरार हो गया.
जांच के मुताबिक, रकम आगे किस व्यक्ति को सौंपनी थी, इसकी जानकारी पवन कुमार ठाकुर को थी.
जांच में ‘गैंग नेटवर्क’ पर फोकस
ATS ने अपनी जांच में विकास तिवारी को कथित तौर पर पांडेय गैंग का प्रमुख बताया. केस डायरी में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि झारखंड के कई जिलों में इस नेटवर्क के जरिए कारोबारियों, कोयला व्यापारियों, ठेकेदारों और उद्योगपतियों से कथित तौर पर रंगदारी वसूली जाती थी.
यानी जांच का मुख्य सवाल यह बन गया कि 50 लाख रुपये किसी एक व्यक्ति की निजी रकम थी या किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी रकम.
ATS ने इसी कड़ी को BNS की धारा 111 के तहत संगठित अपराध की जांच का आधार बनाया.
जेल में रहते हुए नेटवर्क चलाने की जांच
विकास तिवारी की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि घटना के समय वह जेल में था और इसलिए वह बजरंग ठाकुर या पवन ठाकुर को 50 लाख रुपये देने के लिए मौके पर मौजूद नहीं हो सकता था.
लेकिन ATS की जांच ने इस दलील को अलग तरीके से देखा. कोर्ट के आदेश में दर्ज जांच सामग्री के अनुसार, एजेंसी का मानना है कि संगठित अपराध के नेटवर्क को जेल के भीतर से भी निर्देशित किया जा सकता है. इसलिए किसी आरोपी का घटनास्थल पर मौजूद नहीं होना अपने आप में उसकी भूमिका को खत्म नहीं करता.
यही बिंदु इस मामले की जांच का अहम हिस्सा है. ATS ने कथित तौर पर यह जांच की कि जेल में बंद विकास तिवारी और बाहर मौजूद उसके नेटवर्क के बीच किस तरह संपर्क और आर्थिक लेनदेन संचालित होता था.
पवन ठाकुर की भूमिका भी जांच के केंद्र में
50 लाख रुपये की बरामदगी के समय बजरंग ठाकुर पकड़ा गया, जबकि पवन कुमार ठाकुर फरार हो गया. जांच के अनुसार, दोनों को विकास तिवारी गैंग का सक्रिय सदस्य बताया गया.
बजरंग के कथित बयान में भी पवन का नाम आया. उसने बताया कि रकम लेकर दोनों पटना पहुंचे थे और रकम किसे दी जानी थी, इसकी जानकारी पवन को थी.
इससे जांच में एक दूसरी कड़ी जुड़ी. ATS के लिए यह पता लगाना जरूरी था कि रकम का अंतिम रिसीवर कौन था और क्या यह रकम वास्तव में किसी बड़े रंगदारी नेटवर्क का हिस्सा थी.
50 लाख रुपये की बरामदगी से कई पुराने मामलों की कड़ी जोड़ने की कोशिश
जांच के दौरान ATS ने विकास तिवारी, बजरंग ठाकुर और पवन ठाकुर के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों की भी जानकारी जुटाई.
केस डायरी में विकास तिवारी के खिलाफ कई आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है. जांच एजेंसी ने इन्हीं पुराने मामलों और मौजूदा 50 लाख रुपये की बरामदगी को जोड़कर कथित संगठित अपराध की तस्वीर पेश की.
हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आपराधिक मामलों को अलग नजरिए से रखा. उसका कहना था कि विकास तिवारी लंबे समय से जेल में है और कई मामलों में उसे अदालत से बरी किया जा चुका है. इसलिए पुराने मामलों के आधार पर उसे मौजूदा केस से जोड़ना उचित नहीं है.
जांच का सबसे अहम सवाल: 50 लाख रुपये किसके थे और कहां जाने थे?
पूरे मामले की जांच का केंद्र 50 लाख रुपये ही है. ATS के मुताबिक रकम का कोई वैध स्रोत सामने नहीं आया और पूछताछ में इसे विकास तिवारी से जोड़ा गया.
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