प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर का दो दिवसीय धनबाद दौरा मंगलवार को समाप्त हो गया. 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चले दौरे में उन्होंने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता, प्रमुख परियोजनाओं और झरिया में आग व भू-धंसान से प्रभावित लोगों के पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की. दौरे का मुख्य फोकस देश में कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाने और झरिया पुनर्वास कार्य में तेजी लाने पर रहा.
धनबाद स्थित कोयला भवन में तरुण कपूर ने बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधकों के साथ बैठक की. कंपनी ने 2030-31 तक का उत्पादन रोडमैप और आने वाले वर्षों की कार्ययोजना उनके सामने रखी. बैठक में कोयला उत्पादन और आपूर्ति, उपलब्ध भंडार, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई. भूमिगत और खुली खदानों के प्रदर्शन की समीक्षा के साथ आधुनिक खनन तकनीक के विस्तार पर भी विचार किया गया.
कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाने पर जोर
तरुण कपूर ने देश की कोकिंग कोल जरूरतों को पूरा करने में बीसीसीएल की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई.
बैठक में कंपनी की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और मुनाफा बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई. भारत में स्टील उद्योग के लिए जरूरी कोकिंग कोल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है. ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बता दें, कोकिंग कोल एक उच्च गुणवत्ता वाला कोयला है जिसका उपयोग मुख्य रूप से स्टील (इस्पात) बनाने के लिए किया जाता है, क्योंकि इसे हवा की अनुपस्थिति में उच्च तापमान पर गर्म करने पर यह मजबूत और शुद्ध ‘कोक’ (Coke) में बदल जाता है. यह कोक ब्लास्ट फर्नेस में लोहे के अयस्क को पिघलाकर कच्चा लोहा बनाने में ईंधन और रिड्यूसिंग एजेंट की भूमिका निभाता है. सामान्य थर्मल कोयले (जिसका उपयोग बिजली बनाने में होता है) की तुलना में इसमें कार्बन अधिक और राख की मात्रा कम होती है, और चूंकि भारत में इसका घरेलू उत्पादन सीमित है, इसलिए स्टील उद्योग के लिए भारत को अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से आयात करना पड़ता है.
बंद खदानों को फिर से शुरू करने की तैयारी
बीसीसीएल ने लंबे समय से बंद पड़ी खदानों को दोबारा शुरू करने की योजना भी बैठक में रखी. इन खदानों को खदान विकासकर्ता और संचालक तथा राजस्व साझेदारी मॉडल के जरिए विकसित करने की तैयारी की जा रही है. इसका मकसद उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर कोयला उत्पादन और कंपनी की आय बढ़ाना है. झरिया कोयला क्षेत्र में खनन गतिविधियों को बेहतर बनाने और कोयले की गुणवत्ता सुधारने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई.
बीसीसीएल की स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई. कंपनी के अनुसार 31 मार्च 2026 तक करीब 27.97 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चालू की जा चुकी है. इसके अलावा शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में 538 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. कंपनी में डिजिटलीकरण और कामकाज को आधुनिक बनाने की योजनाओं की भी समीक्षा की गई.
तरुण कपूर ने मुनीडीह स्थित कोयला परत मीथेन परियोजना के पहले खंड का निरीक्षण किया. इस परियोजना में कोयले की परतों में मौजूद मीथेन गैस निकाली जा रही है. उन्होंने मुनीडीह की 16वीं कोयला परत में चल रही आधुनिक भूमिगत खनन परियोजना का भी जायजा लिया. इस परियोजना के जरिए आधुनिक मशीनों और तकनीक की मदद से बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन की योजना है.
झरिया की भूमिगत आग प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
दौरे के दौरान तरुण कपूर ने कुसुंडा क्षेत्र स्थित ईएनए अग्नि परियोजना (ENA Fire Project) का निरीक्षण किया. झरिया कोयला क्षेत्र के कई इलाकों में जमीन के नीचे लंबे समय से आग लगी हुई है, जिसके कारण भू-धंसान और गैस निकलने का खतरा बना रहता है. उन्होंने आग की निगरानी और नियंत्रण के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक उपायों की जानकारी ली. इसमें तापीय तकनीक और उपग्रह आधारित निगरानी समेत अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं. उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे लोगों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास की स्थिति की भी समीक्षा की गई.
बेलगड़िया और करमाटांड़ में पुनर्वास कार्य की समीक्षा
दौरे के दूसरे दिन तरुण कपूर ने बेलगड़िया और करमाटांड़ स्थित पुनर्वास स्थलों का जायजा लिया. इन क्षेत्रों में झरिया के आग और भू-धंसान प्रभावित इलाकों से हटाए गए परिवारों को बसाया जा रहा है. उन्होंने पुनर्वास कार्य की प्रगति और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने में आ रही समस्याओं की जानकारी ली. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास कार्य में तेजी लाना दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा.

धनबाद समाहरणालय में संशोधित झरिया मास्टर प्लान को लेकर उच्चस्तरीय बैठक भी हुई. इसमें जिला प्रशासन के अलावा रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, दूरसंचार विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में आग और भू-धंसान से प्रभावित खतरनाक इलाकों में रह रहे लोगों को जल्द सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई.
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