आनंद दत्त/किसलय शानू
जेपीएससी-जेएसएससी मेधा घोटाले में सीआईडी को हर दिन नए तथ्य मिल रहे हैं. नए खुलासे के मुताबिक कैंडिडेट सेटिंग के साथ-साथ पेपर लीक को लेकर भी साजिश रची जा रही थी. इस मामले में मुख्य सचिव कार्यालय के गोपनीय शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर कार्यरत रहे धर्मेंद्र कुमार की भूमिका सामने आ रही है. टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के नए खुलासे में पूरा प्रकरण सामने आया है.
रामवीर सिंह की ओर से सीआईडी के समक्ष दिए बयान में उसने बताया, सिविल जज पीटी की परीक्षा हमारी एजेंसी ने नहीं कराई. पीटी का मेरिट लिस्ट किसी थर्ड एजेंसी के माध्यम से जारी किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसमें से 2 प्रश्न हटाए गए थे. इसके बाद मेरी कंपनी ने संशोधित मेरिट लिस्ट जारी किया था. जिसके बाद 200 छात्र बाहर हो गए और 200 नए छात्र मेरिट लिस्ट में आ गए.
इसके बाद एफआरओ एवं पीसीएफ की परीक्षा हमारी एजेंसी ने कंडक्ट कराया. जिसमें धर्मेंद्र ने मुझे 10-12 छात्रों का सेलेक्शन करने बोला. यही नहीं, धर्मेंद्र ने यह भी दबाव बनाया कि पेपर लीक कर दो. मैंने उसके इस बात को मना कर दिया और कहा कि जो भी काम होगा, वो कमिशन के अंदर यानी जेपीएससी के अंदर ही होगा.
तत्काल मैंने इस बात की सूचना जेपीएससी के चेयरमैन एल. ख्यांगते को दे दी थी, साथ ही उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी बता दिया था. इस बात को लेकर मेरी और धर्मेंद्र के बीच आए दिन बहस होती रहती थी. एक बार रांची के हीनू चौक स्थित शनि मंदिर के पास हमारा आपस में काफी झगड़ा हुआ था. अभ्यर्थियों के चयन को लेकर मेरे ऊपर काफी प्रेशर डाला जा रहा था. वो कहता था, हमारे कैंडिडेट का चयन करो, नहीं तो जेल भिजवा देंगे.
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धर्मेंद्र के पास एजेंट की लाइन लगी रहती थी. वो हर बात पर चेयरमैन एल. ख्यांगते को फोन मिला देता था और अपना रौब दिखाता था.
रामवीर सिंह ने बताया, धर्मेंद्र के अलावा रवि के द्वारा मुझे बार-बार अपने कैंडिडेट को चयनित करने का प्रेशर डाला जा रहा था. दोनों ये कहते रहते थे कि अगर हमारे कैंडिडेट का चयन नहीं करोगे, तो तुरंत झारखंड से बाहर करवा देंगे. धर्मेंद्र ने खुद को मुख्य सचिव ऑफिस का कर्मचारी बताता था. यहां तक कि वो वहीं बुलाकर मुझसे तीन से चार बार मुलाकात भी की थी. यही नहीं, दबाव बनाने के लिए रवि एक बार जेपीएससी के कार्यालय के गेट तक पहुंच गया था.
कौन है धर्मेंद्र कुमार
सीआईडी को मिली जानकारी के मुताबिक धर्मेंद्र के पिता राज्य के पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के कुक थे. पीपी शर्मा के कार्यकाल में ही धर्मेंद्र की अनुबंध पर कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर बहाली हुई थी. इसके बाद उसने सचिवालय के सिस्टम में धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर लीं.
वह कई मुख्य सचिवों के कार्यकाल में वहां काम करता रहा. सीआईडी अब उसके केवल जेपीएससी कनेक्शन की जांच नहीं कर रही, बल्कि वर्षों के उसके संपर्कों और प्रभाव की पूरी कड़ी खंगाल रही है.

जोहार लाइव ने अपने खुलासे में बताया था कि धर्मेंद्र ने परीक्षा संचालन का काम दिलाने के लिए टीडीपीएल कंपनी से सौदेबाजी की और कमीशन मांगा था. आरोप है कि उसने कंपनी को ओएमआर, एडमिट कार्ड और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने के एवज में 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग की थी.
इसके अलावा कुछ अभ्यर्थियों को पैसे के लेन-देन के आधार पर परीक्षा में पास कराने का भरोसा देने का भी आरोप है. टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी से मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी ने बीते 11 अगस्त को धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया था.
इधर धर्मेंद्र ने जमानत की गुहार लगाते हुए बीते 27 अगस्त को याचिका दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के जांच अधिकारी से केस डायरी की मांग की थी. अब इस मामले की सुनवाई कल यानी 2 सितंबर को होनी है.
पूरे मामले की जांच के दौरान सीआईडी को कोचिंग संचालकों की भूमिका का भी पता चला है. लालपुर के शिवांगन कोचिंग से जुड़े रवि कुमार का नाम अभय तिवारी के अलावा टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने भी लिया है. फिलहाल रवि कुमार फरार बताया जा रहा है. उसकी तलाश में सीआईडी लगातार छापेमारी कर रही है. एजेंसी को उम्मीद है कि बहुत जल्द उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.


