वसीम अख्तर
– बैनर-तख्तियों के साथ सड़क पर उतरे जामडीह के ग्रामीण, उप स्वास्थ्य केंद्र वापस गांव में बनाने की मांग
लातेहार जिला के अनुमंडल महुआडांड़ अंतर्गत ओरसा पंचायत के जामडीह ग्राम में मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव के सैकड़ों ग्रामीण गुरुवार को अपने हक और अधिकार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। बैनर और हाथों में तख्तियां लिए ग्रामीण नारे लगाते हुए जुलूस में शामिल हुए। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर निकला यह जुलूस शास्त्री चौक, बिरसा चौक और रामपुर होते हुए अनुमंडल मुख्यालय परिसर पहुंचा, जहां जुलूस सभा में तब्दील हो गया।
ग्रामीणों के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण जामडीह के लिए स्वीकृत उप स्वास्थ्य केंद्र को दूसरे पंचायत में स्थानांतरित किया जाना है। ग्रामीणों के अनुसार 31 दिसंबर 2025 को जामडीह में ग्रामसभा आयोजित कर उप स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद संवेदक द्वारा गांव में निर्माण सामग्री गिराई गई और भवन की नींव के लिए बुनियाद भी खोदी गई। लेकिन अचानक बिना ग्रामीणों को जानकारी दिए उप स्वास्थ्य केंद्र को चैनपुर पंचायत के सेमबरबुढनी गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। अब वहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जामडीह में ग्रामसभा के माध्यम से जमीन उपलब्ध करा दी गई थी और निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी, तो आखिर उप स्वास्थ्य केंद्र को दूसरी जगह क्यों भेज दिया गया। उनकी मांग है कि उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण जामडीह में ही कराया जाए।
1,287 आबादी, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जामडीह की आबादी 1,287 है। इसमें 651 पुरुष और 636 महिलाएं शामिल हैं। गांव में 232 परिवार हैं। बूढ़ा पहाड़ की तलहटी और छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इस गांव के लोगों को महुआडांड़ प्रखंड और अनुमंडल मुख्यालय पहुंचने के लिए छत्तीसगढ़ होते हुए करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार सरनाडीह और तंबोली होते हुए करीब 20 किलोमीटर का रास्ता है, लेकिन जंगल और पगडंडी होने के कारण इस मार्ग से पैदल ही आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से इसको सड़क में तब्दील करने की मांग कर रहे हैं।
मरीजों को कंधे पर ढोकर अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी
स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बीमार व्यक्ति, जंगली जानवर के हमले में घायल ग्रामीण या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए कंधे पर उठाकर जंगल और पगडंडी वाले रास्ते से लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण इस दौरान कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
चुआं का पानी और पांच साल से बिजली का इंतजार
गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण चुआंडी के पानी पर निर्भर हैं, जो बारिश के दौरान गंदा हो जाता है। वहीं करीब पांच वर्ष पहले बिजली के पोल तो गाड़े गए, लेकिन आज तक तार और ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया। ग्रामीणों ने बिजली और पेयजल की स्थायी व्यवस्था की मांग की।
10 किलोमीटर पैदल जाकर लाते हैं राशन
ग्रामीणों ने बताया कि जामडीह में पीडीएस राशन का वितरण नहीं होता। राशन लेने के लिए उन्हें जंगल के रास्ते करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर तंबोली गांव जाना पड़ता है। इसके बाद राशन को सिर पर लादकर घाट-पहाड़ पार करते हुए गांव वापस लौटना पड़ता है। ग्रामीणों ने जामडीह में ही राशन वितरण सुनिश्चित करने की मांग की।
कार्मेल अस्पताल के पास से निकला जुलूस
ग्रामीण सुबह महुआडांड़ मुख्यालय स्थित कार्मेल अस्पताल के पास जुटे। इसके बाद बैनर और हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाते हुए जुलूस निकाला गया। जुलूस शास्त्री चौक, बिरसा चौक और रामपुर होते हुए अनुमंडल मुख्यालय परिसर पहुंचा। यहां ग्रामीणों ने सभा कर अपनी समस्याएं रखीं और प्रशासन से समाधान की मांग की।
ज्ञापन सौंपकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना-प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उपायुक्त लातेहार के नाम अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें सरनाडीह से जामडीह होते हुए ढोढ़ी पत्थल तक सड़क, छत्तीसगढ़ सीमा से भुगुलडीह तक सड़क, जामडीह में राशन वितरण, जामडीह में ही मतदान केंद्र, बिजली-पानी की व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जामडीह में ही उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की मांग की गई। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा अनुमंडल मुख्यालय पहुंचकर सड़क जाम करेंगे और आंदोलन को और उग्र करेंगे।

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