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    Home»जोहार ब्रेकिंग»JPSC-JSSC आंदोलन की पहली जीत के बाद देवेंद्र महतो बोले- ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं, अब पेपर लीक पर सरकार से चाहिए गारंटी’
    जोहार ब्रेकिंग

    JPSC-JSSC आंदोलन की पहली जीत के बाद देवेंद्र महतो बोले- ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं, अब पेपर लीक पर सरकार से चाहिए गारंटी’

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyAugust 18, 2026No Comments7 Mins Read2
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    देवेंद्र महतो
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    झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद 14 परीक्षाओं के रद्द होने को आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने पहली बड़ी जीत बताया है. सदर अस्पताल से डिस्चार्ज की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान का पहला चरण सफल रहा है, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी है. अब आंदोलन का अगला फोकस सिर्फ परीक्षाएं रद्द कराने पर नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने पर होगा, जिसमें भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली की कोई गुंजाइश न रहे. उन्होंने कहा कि सरकार से अब उन्हें एक ऐसी व्यवस्था की गारंटी चाहिए, जिससे मेहनत करने वाले छात्रों को बार-बार सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े.

    देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि छात्रों का आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ था. इसके बाद 5 जुलाई से प्रत्यक्ष रूप से संघर्ष तेज किया गया. 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत हुई. बाद में आंदोलन को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक ले जाया गया.

    2 अगस्त से छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की. आंदोलन लंबा खिंचने के साथ छात्रों की मुश्किलें भी बढ़ती गईं. इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा. महतो ने कहा कि इस संघर्ष को सिर्फ झारखंड के छात्रों का नहीं, बल्कि देश और विदेश में रहने वाले लोगों का भी समर्थन मिला.

    14 परीक्षाओं का रद्द होना बताया पहली बड़ी जीत

    देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि JPSC-JSSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान का पहला चरण अपने मकसद में सफल रहा है. उनके मुताबिक, टीडीपीएल जैसी ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के जरिए आयोजित परीक्षाओं समेत करीब 14 परीक्षाओं को रद्द किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक, पैरवी, सेटिंग और दूसरी तरह की गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे. आंदोलन के दौरान छात्रों ने लगातार इन मामलों में कार्रवाई की मांग उठाई थी. महतो ने कहा कि अब इन मामलों में कार्रवाई होना छात्रों के संघर्ष का परिणाम है. उन्होंने इसे आंदोलन के पहले चरण की जीत बताया.

    JSSC-CGL और JPSC परीक्षा का भी किया जिक्र

    देवेंद्र नाथ महतो ने JSSC-CGL परीक्षा को लेकर हुए पुराने आंदोलन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि CGL को लेकर छात्र पहले भी सड़क पर उतर चुके हैं. 28 जनवरी 2024 को JSSC कार्यालय के सामने हुए आंदोलन के दौरान छात्रों को पुलिस कार्रवाई और एफआईआर का सामना करना पड़ा था. उनके मुताबिक, उस समय भी परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और अंततः परीक्षा रद्द हुई थी. बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन एक बार फिर विवाद खड़ा हुआ और अब उसे भी रद्द कर दिया गया.

    उन्होंने कहा कि छात्रों ने जब पहली बार इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, तब उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई. अगर उसी समय उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो शायद आज कई छात्रों को दोबारा परेशानी नहीं झेलनी पड़ती.

    ‘ईमानदार छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं’

    परीक्षाएं रद्द होने से उन अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ गई है, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली थी. देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कई छात्रों की ज्वाइनिंग हो चुकी थी. इनमें ऐसे छात्र भी हो सकते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा पास की हो.

    उन्होंने कहा कि कुछ अच्छे और बड़े बदलाव के लिए कुछ कुर्बानी देनी पड़ती है. उन्होंने मेधावी और ईमानदार छात्रों से न घबराने की अपील की. उनका कहना था कि जो छात्र वास्तव में योग्य हैं, उनके साथ न्याय होना चाहिए.

    अब सवाल सिर्फ परीक्षा रद्द कराने का नहीं

    देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 14 परीक्षाओं का रद्द होना एक बड़ी कार्रवाई जरूर है, लेकिन इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन परीक्षाओं की दोबारा परीक्षा होगी तो क्या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फिर पेपर लीक न हो. क्या परीक्षा में फिर से सेटिंग नहीं होगी. क्या किसी तरह की धांधली नहीं होगी. क्या नौकरी पाने के लिए गलत तरीके का इस्तेमाल नहीं होगा.

    उनके मुताबिक, यही अब आंदोलन का सबसे बड़ा सवाल है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सरकार से यह गारंटी मांगी जाएगी कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक या धांधली नहीं होगी.

    ‘किसी मां के बेटे-बेटी को फिर ऐसी लड़ाई न लड़नी पड़े’

    आंदोलन के दौरान छात्रों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए महतो भावुक भी नजर आए. उन्होंने कहा कि छात्रों को भूखे-प्यासे रहना पड़ा. पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा. एफआईआर हुई. कमजोर होते शरीर के बावजूद छात्र संघर्ष करते रहे. इलाज और मेडिकल जांच के बीच भी आंदोलन जारी रहा.

    उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि भविष्य में किसी मां के बेटे या बेटी को अपने सपने और नौकरी के लिए इस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़े. उनका कहना था कि आज स्कूल में पहली या दूसरी कक्षा में पढ़ रहा बच्चा, चौथी-पांचवीं कक्षा का छात्र या मैट्रिक-इंटर की तैयारी कर रहा युवा आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षा देगा. उसका भविष्य इसी परीक्षा व्यवस्था पर निर्भर होगा. इसलिए व्यवस्था अभी से ऐसी बननी चाहिए कि उसे नौकरी के लिए भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर न उतरना पड़े.

    हर परीक्षा के हर चरण का हो ऑडिट

    देवेंद्र नाथ महतो ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग की है. उन्होंने कहा कि हर प्रतियोगी परीक्षा का ऑडिट होना चाहिए. परीक्षा के हर चरण की निगरानी होनी चाहिए और गोपनीयता से लेकर रिजल्ट तक पूरी प्रक्रिया की जांच की व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग की. उनका कहना है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी से लेकर परीक्षा के हर स्तर तक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

    महतो ने कहा कि इसके लिए सरकार को जरूरत पड़े तो विधानसभा में कानून बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मकसद सिर्फ वर्तमान विवाद को खत्म करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें पेपर लीक की कोई जगह न हो.

    आंदोलन को मिले सहयोग के लिए सबका जताया आभार

    देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन के दौरान साथ देने वाले छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और मीडिया का आभार जताया. उन्होंने पुलिस और प्रशासन के उन लोगों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने आंदोलन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया. उन्होंने मेडिकल टीम का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया. साथ ही उन लोगों को भी याद किया, जिन्होंने आंदोलन स्थल पर मौजूद न रहते हुए ऑनलाइन माध्यम से छात्रों की मदद की.

    देवेंद्र महतो ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी. पहले सिर्फ एक दरी थी. एक सप्ताह बाद तिरपाल की व्यवस्था हुई. इसके बाद मच्छरदानी, टेंट, बर्तन, चादर और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था लोगों के सहयोग से होती गई.

    ‘पहला चरण पूरा, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा’

    देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 14 परीक्षाओं का रद्द होना आंदोलन के पहले चरण की सफलता है. अब अगला चरण परीक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने का होगा. उन्होंने कहा कि छात्रों को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां उन्हें अपनी मेहनत और पढ़ाई पर भरोसा हो. उन्हें यह डर न रहे कि परीक्षा के बाद पेपर लीक या धांधली की वजह से पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि अगर छात्रों को लगता है कि उनकी बाकी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखना जरूरी है, तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे.

    Also Read : झारखंडः नितिन नबीन की टीम में जगह पानेवाले एकमात्र नेता प्रदीप वर्मा कौन हैं?

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