रांची: JPSC समेत अन्य नियुक्तियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड जनाधिकार महासभा ने भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक दिशा देने और मुद्दे से भटकाने की कोशिश का आरोप लगाया है. महासभा ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्र-अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की है.
महासभा ने मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विधानसभा घेराव में झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-अभ्यर्थी पहुंचे थे. संगठन के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान छात्र काफी समय तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन बाद में भीड़ में कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने से स्थिति बिगड़ी. महासभा ने पुलिस की ओर से लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताते हुए जिम्मेदार पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
दस दिन बाद वार्ता क्यों?
महासभा ने सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच शुरू हुई बातचीत का स्वागत किया, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि छात्रों से बातचीत के लिए 10 दिनों तक इंतजार क्यों किया गया?
संगठन का कहना है कि सरकार ने छात्रों की कुछ मांगों को स्वीकार किया है, लेकिन कई अहम मांगें अभी भी लंबित हैं. महासभा के मुताबिक, विधानसभा घेराव में उमड़ी बड़ी संख्या यह दिखाती है कि छात्र और अभ्यर्थी नियुक्ति परीक्षाओं में सामने आ रही कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर रूप से नाराज हैं.
भाजपा पर आंदोलन को बांटने का आरोप
झारखंड जनाधिकार महासभा ने भाजपा पर JPSC आंदोलन को अपनी राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने और आंदोलन के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया है. संगठन ने कहा कि छात्र आंदोलन को राजनीतिक ध्रुवीकरण से दूर रखा जाना चाहिए.
महासभा ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल पर कथित तौर पर एक विभाजनकारी बोर्ड लगाया गया है, जिसे अब तक आंदोलन के नेतृत्व ने नहीं हटाया है. संगठन ने इसे आंदोलन की एकजुटता के लिए नुकसानदायक बताया.

हेमंत सोरेन से सीधे हस्तक्षेप की मांग
महासभा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आंदोलनरत छात्रों के साथ सीधे बातचीत करने और उनकी लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने की मांग की है. साथ ही 10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी दोहराई है.
संगठन ने आंदोलनरत छात्रों से भाजपा और RSS से दूरी बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि JPSC आंदोलन को किसी राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा नहीं बनना चाहिए. महासभा के अनुसार, नियुक्तियों से जुड़े ये सवाल सिर्फ छात्रों और अभ्यर्थियों के नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य से जुड़े मुद्दे हैं. महासभा ने शिक्षा व्यवस्था, खासकर स्कूली शिक्षा की कमियों को दूर करने को भी जरूरी बताया है.
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