मुस्कान चौधरी
अगर भारत की संस्कृति को धागों में पिरोया जाए, तो उसका सबसे खूबसूरत रूप हथकरघे पर ही दिखाई देगा. यहां हर रंग के पीछे एक परंपरा है, हर डिजाइन के पीछे एक इतिहास और हर बुनाई के पीछे एक बुनकर की अनगिनत मेहनत. यही वजह है कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस सिर्फ कपड़ों का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की उस जीवंत विरासत का सम्मान है, जिसने समय के साथ खुद को बदला, लेकिन अपनी पहचान कभी नहीं खोई.
भारत की हथकरघा (handloom) परंपरा कपड़ों और बुनाई की कहानी से कहीं ज़्यादा है. यह देश की क्षेत्रीय संस्कृतियों, कारीगरी और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक जानकारी का एक जीता-जागता सबूत है. बारीक रेशम की बुनाई से लेकर खास क्षेत्रीय सूती कपड़ों तक, भारत की हथकरघा विरासत अपनी गहरी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए लगातार विकसित हो रही है.
7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026’ मनाया जा रहा है, जो इस सालाना आयोजन का 12वां संस्करण है. इस साल के समारोह में इनोवेशन (नवाचार), सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन), टेक्नोलॉजी और आज के भारत में हथकरघा की बदलती भूमिका पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है.
यह तारीख़ स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाती है, जो 7 अगस्त, 1905 को शुरू हुआ था. इस आंदोलन ने स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया और घरेलू उद्योगों, जैसे कि हथकरघा बुनाई, को नई गति दी. सरकार ने 2015 में 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ घोषित किया.
*PM मोदी ने नागरिकों से बुनकरों का समर्थन करने की अपील की*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) के मौके पर भारत की समृद्ध बुनाई परंपराओं को रेखांकित किया और बुनकरों व कारीगरों के योगदान को सराहा.
‘X’ पर एक पोस्ट में, मोदी ने देश की पारंपरिक वस्त्र विरासत को संजोए रखने के लिए कारीगरों की पीढ़ियों की प्रशंसा की और कहा कि सरकार हथकरघा क्षेत्र का समर्थन करना जारी रखेगी. उन्होंने हथकरघा को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया.

Today, on National Handloom Day, we celebrate India’s rich and vibrant handloom heritage. We also salute the skill, creativity and dedication of our weavers and artisans. For generations, they have preserved and enriched our traditions.
Our Government will keep supporting the…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 7, 2026
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह दिन देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत के हथकरघा बुनकरों के योगदान को मान्यता देता है. हथकरघा उत्पादन स्थानीय समुदायों और पारंपरिक कौशल से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. बड़े पैमाने पर बनने वाले कपड़ों के विपरीत, हाथ से बुने हुए उत्पादों में अक्सर उस क्षेत्र, समुदाय और कारीगर की खास पहचान झलकती है जिन्होंने उन्हें बनाया है.
इस दिन का मकसद ग्राहकों को असली हथकरघा उत्पादों की सराहना और समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करना है, साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े रोज़गार के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है.
भारत का टेक्सटाइल और हथकरघा सेक्टर: परंपरा, रोज़गार और वैश्विक पहचान
भारत का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है. भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक है. वित्त वर्ष 2023-24 में देश के कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 8.21% रही, जबकि वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार में भारत का योगदान 4.5% है. भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यात का लगभग 47% हिस्सा अमेरिका और यूरोपीय संघ को जाता है.
रोज़गार के लिहाज़ से भी यह क्षेत्र बेहद अहम है. टेक्सटाइल उद्योग 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण कारीगर शामिल हैं. यही वजह है कि यह क्षेत्र ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ और महिला सशक्तिकरण जैसी सरकारी पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

हथकरघा : विरासत भी, आजीविका भी
भारत का हथकरघा उद्योग देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी का भी आधार है. कपड़ा मंत्रालय की चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-20) के अनुसार, देश में 31.45 लाख हथकरघा परिवार और करीब 35.22 लाख बुनकर एवं संबद्ध कामगार इस क्षेत्र से जुड़े हैं. इनमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, जो इस उद्योग को महिला सशक्तिकरण का भी मजबूत माध्यम बनाती हैं.
भारतीय हथकरघा उत्पादों जैसे बनारसी, कांजीवरम, टसर, पश्मीना और चंदेरी की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है. हालांकि, पावरलूम से प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, युवाओं का इस पेशे से दूर होना और सीमित बाजार जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं.
फिर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, जीआई टैग, क्लस्टर विकास और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों ने बुनकरों के लिए नए अवसर खोले हैं. आज गांव के करघे से निकला कपड़ा सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंच रहा है, जिससे भारत का हथकरघा उद्योग नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है.
भारत की पहचान है हथकरघा
भारत दुनिया के सबसे बड़े हथकरघा उत्पादक देशों में शामिल है. देश के लगभग हर राज्य की अपनी अलग बुनाई, डिजाइन और पहचान है.
- उत्तर प्रदेश की शान है बनारसी सिल्क
- तमिलनाडु की शान है कांजीवरम साड़ी
- कश्मीर का गौरव है पश्मीना शॉल
- मध्य प्रदेश की खूबसूरती है चंदेरी और महेश्वरी
- गुजरात की कला है पटोला और बंधनी
- ओडिशा और तेलंगाना की पहचान है इकत
- पश्चिम बंगाल की विरासत है बालूचरी साड़ियों
- टसर और डोकरा शिल्प के साथ झारखंड की समृद्ध परंपरा
इन सभी उत्पादों में मशीनों की नहीं, बल्कि कारीगरों के हाथों की मेहनत और वर्षों के अनुभव की छाप होती है.
झारखंड के हथकरघा की अलग पहचान
झारखंड का नाम आते ही लोगों के मन में खनिज संपदा की तस्वीर उभरती है, लेकिन यह राज्य अपनी समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा परंपरा के लिए भी जाना जाता है. यहां तसर सिल्क (Tussar Silk) की देशभर में विशेष पहचान है. रांची, गोड्डा, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़, जामताड़ा और पश्चिम सिंहभूम जैसे जिलों में हजारों परिवार तसर उत्पादन और बुनाई से जुड़े हुए हैं. झारखंड की तसर साड़ियां, दुपट्टे, स्टोल और फैब्रिक अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और पारंपरिक डिजाइन के कारण देश-विदेश में पसंद किए जाते हैं. राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाएं समय-समय पर बुनकरों को प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, विपणन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही हैं.
जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा… कैमरा उठाइए और हथकरघा को दुनिया तक पहुंचाइए
Tomorrow, 7th August is National Handloom Day. Let’s make India’s handloom diversity popular.
Share your videos with your favourite handloom products, including GRWM videos on social media.
Don’t forget to use #NationalHandloomDay. pic.twitter.com/zoFdTXphRL
— Narendra Modi (@narendramodi) August 6, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोगों से अपील की कि वे हथकरघा (हैंडलूम) से बने उत्पाद खरीदें और दुनिया का ध्यान इनकी ओर खींचने के लिए वीडियो बनाएं. हथकरघा दिवस से ठीक पहले, पीएम मोदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया. इसमें उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाने से देश के बुनकरों और छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा,
“7 अगस्त को हम राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाते हैं. आइए, भारत के हथकरघा उत्पादों की विविधता को लोकप्रिय बनाएं. अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के वीडियो बनाएं और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करें.” #NationalHandloomDay का इस्तेमाल करना न भूलें.
प्रधानमंत्री ने लोगों को याद दिलाया कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुआ स्वदेशी आंदोलन आज भी उतना ही प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि जैसे देशभर में लोग फ्रेंडशिप डे उत्साह से मनाते हैं, उसी तरह हथकरघा दिवस को भी एक जन आंदोलन बनाया जाए. उनका संदेश साफ था कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया हर वीडियो किसी बुनकर की मेहनत को नया बाजार दे सकता है. यह सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक छोटा लेकिन मजबूत कदम है.
Also Read : JPSC PT रद्द करो, CBI जांच कराओ, नहीं तो सड़क पर उतरेगा आजसू : सुदेश महतो



