नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. गुरुवार को उनकी अंतरिम मेडिकल बेल याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि लंबित रखते हुए कहा कि अगर भविष्य में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ती है तो वे दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं.
जस्टिस एम.एस. सुंदरश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने एम्स की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन किया. कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि आसाराम को अंतरिम जमानत देने की जरूरत है. एम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए 24 घंटे मेडिकल निगरानी की जरूरत बताई गई है.
24 घंटे केयर गिवर रखने की मिली अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयर गिवर 24 घंटे साथ रखने की अनुमति दी है. कोर्ट ने जेल प्रशासन को भी निर्देश दिया कि उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
साथ ही अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वे दोबारा अंतरिम मेडिकल बेल के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आसाराम ने हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में साझा नहीं की थी. इस पर पीठ ने नाराजगी जाहिर की.
अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया
आसाराम ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी उम्र 80 साल से ज्यादा है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. उनका कहना था कि उन्हें लगातार देखभाल और विशेष चिकित्सा सुविधा की जरूरत है. इसी आधार पर उन्होंने अंतरिम मेडिकल बेल और स्थायी पैरोल की मांग की थी. उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कोर्ट में दलील दी कि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए उन्हें राहत दी जानी चाहिए.
एक महीने पहले सरकार से मांगा था जवाब
इस मामले में करीब एक महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा था. इसके बाद एम्स से मेडिकल रिपोर्ट मंगाई गई, जिसके आधार पर गुरुवार को सुनवाई हुई. इससे पहले 27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम मेडिकल बेल देने से इनकार कर दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्वास्थ्य स्थिति में गंभीर बदलाव आता है, तो आसाराम नई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दोबारा राहत की मांग कर सकते हैं.
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