झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है. आंदोलन के बीच अब एक और सवाल उठ रहा है, क्या यह आंदोलन पूरी तरह छात्र केंद्रित और गैर-राजनीतिक है या फिर धीरे-धीरे इसका राजनीतिकरण हो रहा है?
दरअसल, आंदोलन में छात्रों के बीच भी दो अलग-अलग धड़े दिखाई दे रहे हैं. एक धड़ा ऐसा है जो राजनीतिक दलों और नेताओं से पूरी तरह दूरी बनाए रखना चाहता है. इन छात्रों का मानना है कि आंदोलन में राजनीतिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ने से छात्रों की मूल मांगें पीछे छूट सकती हैं और आंदोलन का मुद्दा राजनीतिक रंग ले सकता है.
इन छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए CBI जांच और परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने जैसी मांगें शामिल हैं.
वहीं, दूसरी तरफ राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन भी आंदोलन को मिल रहा है. हालांकि, यहां एक अहम सवाल यह भी है कि किसी राजनीतिक नेता का आंदोलन को समर्थन देना और आंदोलन का पूरी तरह राजनीतिक हो जाना, क्या दोनों एक ही बात हैं?
आंदोलन की शुरुआत और राजनीतिक कनेक्शन
आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को मोरहाबादी स्थित गांधी पार्क से हुई थी. इसकी शुरुआत में JLKM से जुड़े छात्र नेता देवेंद्र नाथ की भूमिका बताई जा रही है. इसके बाद आंदोलन में अलग-अलग छात्र समूहों की सक्रियता बढ़ी.
अब आंदोलन में राजनीतिक समर्थन भी दिखाई दे रहा है. ऐसे में आंदोलन के गैर-राजनीतिक स्वरूप को लेकर छात्रों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं.
कौन-कौन से नेता समर्थन में आए?
झारखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि वह आंदोलन में सीधे शामिल नहीं होना चाहते, क्योंकि उनकी भागीदारी को लेकर अलग-अलग तरह के आरोप लगाए जा सकते हैं. जिसमें मिशनरी या ईसाई कनेक्शन शामिल है. हालांकि, इससे पहले उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के लिए खाने-पीने की सामग्री भेजी थी.
वहीं, रांची की मेयर रोशनी खलखो भी छात्रों के बीच पहुंचीं और आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया. उन्होंने आंदोलन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से अलग बताते हुए कहा कि यहां देश विरोधी बातें नहीं हो रही हैं.
JLKM विधायक जयराम महतो भी आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दे चुके हैं. इसके अलावा, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी आंदोलन स्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया। बीजेपी के कई अन्य नेताओं जिनमें अन्नपूर्णा देवी, हिमंता बिस्वा सरमा, संजय सेठ, निशिकांत दुबे, दीपक प्रकाश और मनीष जायसवाल शामिल हैं, ने भी बयान जारी कर आंदोलन का समर्थन किया है.
अन्य राजनीतिक समर्थन की बात करें तो अभिजीत दीपके का नाम भी सामने आया है. उनके भी आंदोलन को समर्थन देने के लिए रांची आने की बात कही जा रही है.
तो कितना राजनीतिक, कितना गैर-राजनीतिक?
अगर आंदोलन की मौजूदा तस्वीर को देखें तो इसकी मुख्य मांगें छात्रों और परीक्षा से जुड़ी हैं. आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इस लिहाज से आंदोलन का मूल मुद्दा छात्र हित से जुड़ा हुआ है.
लेकिन दूसरी तरफ, जिस तरह अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, उससे आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता. यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि मुद्दा छात्र हित का है, आंदोलन का आधार छात्रों की मांगें हैं, लेकिन आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या राजनीतिक नेताओं का समर्थन छात्रों की आवाज को मजबूत करेगा या फिर इससे आंदोलन की मूल मांगें राजनीतिक बहस में दब जाएंगी? यही तय करेगा कि JPSC को लेकर चल रहा यह आंदोलन आने वाले दिनों में कितना छात्र आंदोलन रहता है और कितना राजनीतिक आंदोलन बनता है.

