जामताड़ा : झारखंड के कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा, जो रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था, उसका सोमवार को जामताड़ा सदर अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पोस्टमार्टम कराया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी अविश्वर मुर्मू की मौजूदगी में डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया।
डॉ. दुर्गेश झा, डॉ. मिकी माझी और डॉ. विशाल की टीम ने जांच के दौरान मृतक के शरीर से दो गोलियां बरामद कीं। डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर पर कई जगह गोलियों के आर-पार होने के निशान भी मिले हैं, जिससे साफ है कि मुठभेड़ के दौरान उसे कई गोलियां लगी थीं।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजन
पोस्टमार्टम के बाद रांची के रातू रोड, पंडरा निवासी सुजीत सिन्हा के ससुराल पक्ष के लोग—सास ऊषा देवी, साला आयुष राज और अन्य परिजन—रोते-बिलखते पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक शव परिजनों को नहीं सौंपा गया था।
परिजनों ने बताया कि सुजीत का भाई, जो फिलहाल छत्तीसगढ़ में रहता है, जामताड़ा के लिए रवाना हो चुका है। उसके पहुंचने के बाद शव परिवार को सौंपे जाने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
परिजनों ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप
पोस्टमार्टम के बाद परिजन जामताड़ा थाना पहुंचे और मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर कई गंभीर आरोप लगाए। सुजीत की सास ऊषा देवी ने मुठभेड़ को **पूर्व नियोजित** बताते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर करार दिया और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की।
ऊषा देवी का दावा है कि करीब एक महीने पहले ही सुजीत ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आशंका जताई थी कि किसी दूसरी जेल में स्थानांतरण के दौरान पुलिस उसका एनकाउंटर कर सकती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट में रिट याचिका भी दायर की गई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जेल शिफ्टिंग के दौरान पुलिस ने उसे गोली मार दी।
पुलिस के दावे पर उठाए सवाल
परिजनों का कहना है कि सुजीत ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि उसकी जेल से भागने की कोई मंशा नहीं है। ऐसे में पुलिस का यह दावा कि उसने जवान की राइफल छीनकर भागने की कोशिश की, कई सवाल खड़े करता है।
ऊषा देवी ने कहा कि अगर वह भागने की कोशिश भी करता तो पुलिस उसे पैर में गोली मारकर पकड़ सकती थी। लेकिन, उनके मुताबिक उस पर कई गोलियां चलाई गईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पत्नी और जेल व्यवस्था पर भी सवाल
बातचीत के दौरान ऊषा देवी ने सुजीत की पत्नी रिया सिन्हा को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि रिया पिछले आठ महीने से होटवार जेल में बंद थी और जेल की एक कथित घटना की जानकारी होने के कारण उसका स्थानांतरण चाईबासा जेल किया गया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कड़ी सुरक्षा वाली जेल में रिया के पास मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। उनके मुताबिक, इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
परिवार को नहीं दी गई आधिकारिक सूचना
परिजनों के अनुसार, सुजीत सिन्हा का एक बेटा है, जो कक्षा छह में पढ़ता है और फिलहाल रांची के पंडरा (रातू रोड) स्थित अपने ननिहाल में रह रहा है। बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उसे इलाज के लिए भेजा गया है।
ऊषा देवी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना की आधिकारिक जानकारी परिवार को नहीं दी। उन्हें रविवार देर रात परिचितों के व्हाट्सएप संदेश और टीवी समाचारों के जरिए सुजीत की मौत की खबर मिली।
परिजनों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे विरोधस्वरूप आंदोलन करेंगे।
पुलिस का पक्ष
वहीं, पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ को लेकर वह पहले ही अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
नोट : इस खबर में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में मुठभेड़ को नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताय
Also Read : जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CID जांच तेज, कई राज्यों की परीक्षाओं से भी जोड़े जा रहे तार

