Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»आदिवासी»संसद में आदिवासी: क्या खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है लद्दाख की चांगपाओं?
    आदिवासी

    संसद में आदिवासी: क्या खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है लद्दाख की चांगपाओं?

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkAugust 1, 2026No Comments4 Mins Read0
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Changpa
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    विजय उरांव

    लद्दाख के बर्फीले पहाड़, नीली झीलें, विशाल पठार और ठंडे रेगिस्तान दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. लेकिन इसी लद्दाख के चांगथांग (Changthang) इलाके में रहने वाले चांगपा (Changpa) आदिवासी समुदाय की जिंदगी आसान नहीं है. पश्मीना बकरियों, भेड़ और याक के सहारे गुजर-बसर करने वाले इस घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय के सामने बदलते मौसम, बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव, सिकुड़ते चरागाह और पशुधन की घटती उत्पादकता जैसी चुनौतियां हैं.

    इन बदलावों का चांगपा की आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली पर कितना असर पड़ा है, इसका आकलन करने के लिए सरकार ने अब तक कोई अध्ययन नहीं कराया है. जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 30 जुलाई 2026 को लोकसभा में यह जानकारी दी.

    लोकसभा में क्या पूछा, सरकार ने क्या कहा?

    लोकसभा में (Q. n. 2049) सांसद मोहम्मद हनीफा ने सरकार से पूछा था कि क्या उसने जलवायु परिवर्तन, घटते चरागाह, बदलती बर्फबारी और पशुधन की घटती उत्पादकता का Changpa समुदाय की आजीविका और पारंपरिक घुमंतू जीवनशैली पर असर का आकलन किया है. जवाब में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा कि उसने इस संबंध में कोई अध्ययन नहीं कराया है.

    चांगपा समुदाय की चिंता सिर्फ जलवायु परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि चांगथांग में तेजी से बढ़ रही विकास परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पूगा (Puga) में जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट (Geothermal Power Project) और पांग (Pang) में बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट (Solar Power Project) जैसी परियोजनाएं ऐसे इलाकों में आगे बढ़ रही हैं, जहां चांगपा की पारंपरिक आजीविका चरागाहों, पानी और पशुधन पर निर्भर है.

    स्थानीय पशुपालकों की चिंता है कि परियोजनाओं के चलते चराई के इलाके और पानी के स्रोत प्रभावित हुए तो उन्हें अपने पशुओं को दूर और ऊंचे इलाकों में ले जाना पड़ सकता है. ऐसे में यह जांच का विषय है कि चांगपा समुदाय पर पड़ने वाले पर्यावरणीय दबाव में जलवायु परिवर्तन की भूमिका कितनी है और विकास परियोजनाओं का कितना असर है.

    योजनाओं का लाभ, पश्मीना से आजीविका बढ़ाने की कोशिश

    सरकार के अनुसार ST समुदाय होने के कारण चांगपा परिवार PM-JANMAN, DAJGUA, EMRS, प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप समेत कई योजनाओं के पात्र हैं. DAJGUA के तहत दूरदराज की जनजातीय बस्तियों में मोबाइल मेडिकल यूनिट, मोबाइल नेटवर्क, आवासीय छात्रावास और PM-AWAS (ग्रामीण) के तहत पक्के मकान जैसी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है.

    PMJVM के तहत TRIFED ने Durbuk में वन धन विकास केंद्र (VDVK) के लिए 15 लाख रुपये जारी किए हैं. वहीं, पिछले पांच वर्षों में TRIFED ने लद्दाख के कारीगरों से 1,88,47,291 रुपये के पश्मीना उत्पाद खरीदे हैं. सरकार का कहना है कि इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा पश्मीना चांगपा समुदाय से आता है, इसलिए इसका अप्रत्यक्ष लाभ पशुपालकों को मिलता है.

    अगस्त 2026 में चांगथाग में empanelment camp आयोजित करने का प्रस्ताव भी है, ताकि चांगपा समुदाय के पात्र कारीगरों को सरकारी मार्केटिंग और खरीद कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जा सके.

    लद्दाख के EMRS के लिए 1,677.41 लाख रुपये

    सरकार ने पिछले पांच वर्षों में लद्दाख के EMRS के लिए जारी राशि का भी ब्योरा दिया है. 2021-22 में 10 लाख, 2022-23 में 450 लाख, 2023-24 में 800 लाख, 2024-25 में 17.41 लाख और 2025-26 में 400 लाख रुपये जारी किए गए. हालांकि इन आंकड़ों को चांगपा समुदाय के लिए अलग से जारी राशि नहीं माना जा सकता.

    सरकार ने चांगपा की संस्कृति, भाषा और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार के लिए Tribal Research Institute के जरिए काम किए जाने की भी जानकारी दी है.

    कौन हैं चांगपा समुदाय

    चांगपा लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में रहने वाला मुख्य रूप से घुमंतू और अर्ध-घुमंतू पशुपालक अनुसूचित जनजाति समुदाय है. इनकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पश्मीना बकरियों पर निर्भर है. भेड़ और याक पालन भी इनकी पारंपरिक आजीविका का हिस्सा है.

    चांगपा समुदाय की आबादी जनगणना 2011 के अनुसार, 2661 थी, इनमें 1355 पुरुष और 1306 महिलाएं थी. इसमें 2257 लोग ग्रामीण और 404 शहरी क्षेत्रों में दर्ज किए गए थे. यह 2011 का आंकड़ा है, इसलिए मौजूदा आबादी इससे अलग हो सकती है.

    Also Read : संसद में आदिवासी: PVTGs के लिए यूपी में 5 वन धन केंद्र, सभी बिजनौर में; क्या सच में बदल रही जिंदगी?

    चांगपा सांसद मोहम्मद हनीफा
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleकहानी भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट की, दुर्बा बनर्जी के बारे में सबकुछ

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    कहानी भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट की, दुर्बा बनर्जी के बारे में सबकुछ

    August 1, 2026
    आदिवासी

    संसद में आदिवासी: PVTGs के लिए यूपी में 5 वन धन केंद्र, सभी बिजनौर में; क्या सच में बदल रही जिंदगी?

    August 1, 2026
    क्राइम

    JOHAR LIVE BIG BREAKING: रांची की प्रेरणा का मॉस्को इंटरपोल इनपुट से खुला ड्रग्स लिंक, नेपाल के रास्ते लौटी भारत, इंटरपोल ने शुरू की तलाश

    August 1, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: डॉक्टरों का बड़ा फेरबदल, 72 चिकित्सकों का तबादला

    July 31, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    ..और अब ओडिशा में पेपर लीक मामला, WhatsApp से पहुंचा मेडिकल PG का पेपर

    July 31, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    आरक्षण पर ‘भीख-कैंसर’ वाली सोच से भड़के अठावले, बोले- युवाओं के मन में जहर घोल रहे हैं

    July 31, 2026
    Latest Posts

    संसद में आदिवासी: क्या खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है लद्दाख की चांगपाओं?

    August 1, 2026

    कहानी भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट की, दुर्बा बनर्जी के बारे में सबकुछ

    August 1, 2026

    संसद में आदिवासी: PVTGs के लिए यूपी में 5 वन धन केंद्र, सभी बिजनौर में; क्या सच में बदल रही जिंदगी?

    August 1, 2026

    JOHAR LIVE BIG BREAKING: रांची की प्रेरणा का मॉस्को इंटरपोल इनपुट से खुला ड्रग्स लिंक, नेपाल के रास्ते लौटी भारत, इंटरपोल ने शुरू की तलाश

    August 1, 2026

    झारखंड: डॉक्टरों का बड़ा फेरबदल, 72 चिकित्सकों का तबादला

    July 31, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.