केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास अठावले ने सोशल मीडिया पर आरक्षण को लेकर की जाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियों पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि आरक्षण के संवैधानिक अधिकार को ‘भीख’ या ‘कैंसर’ कहकर अपमानित करना समाज में नफरत और भेदभाव को बढ़ावा देता है. अठावले ने सोशल मीडिया पर यह बात साझा करते हुए युवाओं से ऐसी नफरत भरी बातों से निराश न होने और एकजुट रहकर आगे बढ़ने की अपील की.
आरक्षण को भीख या कैंसर कहना समाज को बांटने की कोशिश
रामदास अठावले ने कहा कि आज देश इंटरनेट और Gen-Z के आधुनिक दौर में पहुंच गया है, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि कुछ लोग अब भी सोशल मीडिया पर आरक्षण को ‘भीख’ या ‘कैंसर’ कहकर अपमानित करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें पढ़कर आरक्षित और वंचित वर्ग के युवाओं के दिल पर क्या गुजरती होगी, यह समझने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि कई जगहों पर युवा अपनी जाति बताने में भी शर्म महसूस करते हैं. अठावले ने सोशल मीडिया पर आने वाले भद्दे कमेंट्स और उनके युवाओं पर पड़ने वाले मानसिक असर का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को बांटने का काम कर रहे हैं.
नफरत को प्यार से हराना है, समानता का सपना सच करना है
अठावले ने सोशल मीडिया पर होने वाले इस तरह के भावनात्मक भेदभाव को ‘राष्ट्रद्रोह’ जैसा बताया. उन्होंने कहा कि ऐसी सोच देश को बांटने का काम करती है. उनके मुताबिक, कुछ ताकतों ने बच्चों के मन में गलतफहमियां पैदा कर दी हैं और उनके भीतर द्वेष का जहर भर दिया है, जिसे हर हाल में दूर करना होगा.
उन्होंने कहा कि देश विकास में बहुत आगे बढ़ चुका है, लेकिन कुछ लोगों की मानसिकता आज भी पिछड़ी हुई है. अठावले ने युवाओं से अपील की कि वे ऐसी नफरत भरी बातों से निराश न हों और नफरत को प्यार से हराएं. उन्होंने कहा कि आज भी कई बच्चे जाति या आर्थिक तंगी के कारण अपने मुकाम तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. ऐसे लोगों को न्याय और समान अवसर दिलाना ही लक्ष्य होना चाहिए. उन्होंने युवाओं से एकजुट रहने और आगे बढ़ने की अपील की.
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