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    Home»जोहार ब्रेकिंग»कौन हैं तस्लीमा नसरीन, जो 19 साल बाद कोलकाता वापस आई हैं
    जोहार ब्रेकिंग

    कौन हैं तस्लीमा नसरीन, जो 19 साल बाद कोलकाता वापस आई हैं

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 31, 2026No Comments4 Mins Read2
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    बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल बाद एक बार फिर कोलकाता लौट आई हैं. वह शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को शहर पहुंचीं. उनकी यह वापसी इसलिए खास है, क्योंकि नवंबर 2007 में कोलकाता में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था. करीब दो दशक बाद उनकी वापसी ने एक बार फिर उनके लेखन, उनके विचारों और उस पूरे विवाद की चर्चा शुरू कर दी है.

    तस्लीमा इस बार एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता आई हैं. वह 1 अगस्त को रवींद्र सदन में होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी. हालांकि, उनकी यह यात्रा फिलहाल स्थायी वापसी नहीं मानी जा रही है.

    कौन हैं तस्लीमा नसरीन?

    तस्लीमा नसरीन बांग्लादेश में जन्मी लेखिका, कवयित्री और डॉक्टर हैं. उनका जन्म 1962 में मयमनसिंह में हुआ था. उन्होंने मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर के तौर पर काम किया. बाद में उन्होंने लेखन को अपना मुख्य क्षेत्र बना लिया.

    तस्लीमा की पहचान एक बेबाक लेखिका के तौर पर बनी. उन्होंने महिलाओं के अधिकार, लैंगिक भेदभाव, अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक कट्टरता जैसे मुद्दों पर खुलकर लिखा. उनके लेखन की वजह से उन्हें काफी लोकप्रियता मिली, लेकिन विवाद भी कम नहीं हुए.

    लज्जा से मिली दुनिया भर में पहचान

    तस्लीमा की सबसे चर्चित किताबों में लज्जा का नाम सबसे ऊपर आता है. यह उपन्यास 1993 में प्रकाशित हुआ था. किताब की कहानी बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है और इसमें सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे.

    लज्जा के बाद तस्लीमा को कट्टरपंथी समूहों के विरोध का सामना करना पड़ा. उनके खिलाफ धमकियां और फतवे जारी होने की खबरें सामने आईं. आखिरकार 1994 में उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. तब से उनका जीवन निर्वासन में बीत रहा है.

    बांग्लादेश छोड़ने के बाद तस्लीमा ने कई साल यूरोप और अमेरिका में बिताए. साल 2004 में वह भारत आईं और बाद में कोलकाता में रहने लगीं. बंगाली भाषा और संस्कृति से गहरा जुड़ाव होने के कारण वह कोलकाता को अपने लिए खास मानती थीं. लेकिन साल 2007 में उनकी जिंदगी में एक
    बार फिर बड़ा मोड़ आया.

    आखिर क्यों छोड़ना पड़ा कोलकाता?

    नवंबर 2007 में तस्लीमा की आत्मकथात्मक किताब द्विखंडित को लेकर विरोध तेज हो गया. फिर 21 नवंबर 2007 को कोलकाता में उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. जिसके बाद हालात इतने बिगड़े कि शहर में सेना की तैनाती तक करनी पड़ी.

    इसके बाद तस्लीमा को सुरक्षा कारणों से कोलकाता से बाहर ले जाया गया. उन्हें पहले जयपुर और फिर नई दिल्ली ले जाया गया. वह कुछ समय दिल्ली में एक सुरक्षित स्थान पर रहीं. इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र उन्होंने बाद में अपनी किताब Exile में भी किया है.

    फिर कहां रहीं थी तस्लीमा?

    कोलकाता छोड़ने के बाद तस्लीमा का ज्यादातर समय भारत में दिल्ली में बीता. वह भारत में रहने के लिए अलग-अलग समय पर रेजिडेंट परमिट और वीजा व्यवस्था के तहत रही हैं. उनकी नागरिकता और भारत में स्थायी रूप से रहने की इच्छा को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है. कोलकाता लौटने से पहले वह नई दिल्ली में रह रही थीं. अब करीब 19 साल बाद वह फिर कोलकाता पहुंची हैं.

    तस्लीमा की कहानी सिर्फ एक लेखिका की कहानी नहीं है. यह कहानी अभिव्यक्ति की आजादी, धार्मिक कट्टरता, महिलाओं के अधिकार और निर्वासन जैसे बड़े सवालों से भी जुड़ी है. साल 2007 के बाद से तस्लीमा कोलकाता से दूर रहीं, लेकिन शहर से उनका भावनात्मक जुड़ाव बना रहा. अब जब वह करीब 19 साल बाद वापस लौटी हैं, तो उनकी वापसी को लेकर साहित्यिक और सामाजिक हलकों में चर्चा होना स्वाभाविक है.

    फिलहाल उनकी वापसी एक साहित्यिक कार्यक्रम तक सीमित है. लेकिन इस वापसी ने एक सवाल फिर जिंदा कर दिया है, क्या तस्लीमा नसरीन कभी उस कोलकाता में स्थायी रूप से लौट पाएंगी, जिसे वह लंबे समय से अपना घर मानती रही हैं?

    Also Read : भारत को सेक्युलर कहना यानी पानी को गीला कहना – गीतांजलि आंगमो

    taslima nasreen द्विखंडित बांग्लादेश लेखिका तस्लीमा नसरीन
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