रांची. झारखंड में जून 2026 तक मलेरिया के 16,728 मामले सामने आए हैं. इनमें 76 प्रतिशत मामले सिर्फ पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों से हैं. पूर्वी सिंहभूम में 6,527 और पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 मलेरिया केस दर्ज किए गए हैं. वहीं, जून 2026 में डेंगू के 77 मामले सामने आए, जिनमें 27 मामले रांची के हैं. राज्य में वेक्टर जनित रोगों की स्थिति को देखते हुए सरकार ने रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने का निर्देश दिया है.
उच्च मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में जांच, इलाज और निगरानी बढ़ाने के निर्देश
गुरुवार को नेपाल हाउस, डोरंडा में आयोजित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार, जापानी इंसेफेलाइटिस और लिम्फेटिक फाइलेरिया की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास एवं आवास, शिक्षा, श्रम तथा पेयजल एवं स्वच्छता समेत सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा.
उन्होंने विभागों की जिम्मेदारियां तय कर औपचारिक पत्र जारी करने और जिला से पंचायत स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उच्च मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय पर जांच, त्वरित एवं पूर्ण उपचार, दवाओं की उपलब्धता, नियमित निगरानी, मच्छर नियंत्रण और जन-जागरूकता अभियान तेज करने पर जोर दिया गया.
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केवल दवा वितरण नहीं, सेवन सुनिश्चित कराने पर जोर
लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में केवल दवा का वितरण पर्याप्त नहीं है. पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में दवा का सेवन सुनिश्चित कराया जाए. फाइलेरिया मरीजों के लिए रुग्णता प्रबंधन, एमएमडीपी किट, हाइड्रोसील उपचार और नियमित फॉलो-अप को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए.
बैठक में ग्रामसभा, स्कूल-कॉलेज, शहरी निकाय, स्वयं सहायता समूह, औद्योगिक क्षेत्रों और कार्यस्थलों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने, जल-जमाव रोकने, स्वच्छता अभियान चलाने तथा मलेरिया जांच, उपचार और फाइलेरिया रोधी दवा सेवन को बढ़ावा देने पर सहमति बनी. बैठक में स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय निदेशक रविशंकर, एनएचएम के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा, उप सचिव अश्विनी कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, पीरामल और सिनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
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