बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को पीएमएलए की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने मामले के 15 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिनोद कुमार सिंह और राज कुमार पाहन के खिलाफ आरोप गठन फिलहाल टाल दिया गया.
सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियों की ओर से अदालत से समय मांगा गया. वहीं, बिनोद कुमार सिंह ने आरोप गठन से जुड़े 10 जून के आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका के जरिए चुनौती दी है. इसी याचिका को देखते हुए अदालत ने बिनोद कुमार सिंह के साथ हेमंत सोरेन और राज कुमार पाहन के खिलाफ आरोप तय करने का फैसला फिलहाल लंबित रखा है.
क्या है पूरा मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई. जांच एजेंसी ने इस जमीन को कथित तौर पर अपराध से अर्जित संपत्ति यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ बताया है. ED के मुताबिक, जमीन की कीमत करीब 31 करोड़ रुपये है.
जांच के दौरान ED ने तत्कालीन राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप प्रसाद की भूमिका का भी उल्लेख किया था. एजेंसी का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर के जरिए जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई. इसी जांच के आधार पर हेमंत सोरेन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया.
ED ने इस मामले में हेमंत सोरेन को 2024 में गिरफ्तार किया था. हालांकि, हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है. उनका पक्ष रहा है कि विवादित जमीन उनकी नहीं है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं. मामले में अदालत की ओर से आरोप तय किए जाने के बाद अब मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी.
गुरुवार की सुनवाई में तपस घोष, शेखर कुशवाहा, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, आनंद तिर्की उर्फ अंतु तिर्की, अफसर अली, मो. इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रिया रंजन सहाय, बिपिन सिंह, बिजेंद्र सिंह, संजीत कुमार और मोहम्मद इरशाद समेत 15 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए.
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