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    Home»जोहार ब्रेकिंग»रांची : एसएसपी के जनता दरबार में कहीं राहत, कहीं उम्मीद
    जोहार ब्रेकिंग

    रांची : एसएसपी के जनता दरबार में कहीं राहत, कहीं उम्मीद

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJuly 15, 2026No Comments5 Mins Read1
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    रांची
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    रांची के डोरंडा थाना में बुधवार को जनता दरबार लगाया गया. इसका मकसद था… आम लोगों की शिकायतों का समाधान ऑन द स्पॉट कर दिया जाये. राज्य सरकार के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने अब झारखंड के हर थाने में जनता दरबार लगाना जरूरी कर दिया है. बिहार की व्यवस्था को देखते हुए अब झारखंड के सभी थानों में एक तय दिन पर ‘थाना दिवस’ के रूप में यह दरबार आयोजित किया जा रहा है. इस बैठक में थानेदार के साथ-साथ CO और SDO का मौजूद रहना भी अनिवार्य किया गया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या इस व्यवस्था से आम जनता को सच में न्याय मिल पा रहा है?

    डोरंडा थाना के इस जनता दरबार में लोगों की शिकायतों का तुरंत निपटारा करने के लिए रांची के एसएसपी राकेश रंजन खुद मौजूद थे. इस दौरान वहां पहुंचे लोगों की प्रतिक्रियाएं काफी मिली-जुली रहीं. कुछ लोगों को इस व्यवस्था से राहत मिलती दिखी, तो कुछ लोग आज भी अपनी पुरानी दिक्कतों से जूझ रहे हैं. मौके पर जाकर जब लोगों से बात की गई, तो वहां की जमीनी हकीकत कुछ इस तरह सामने आई.

    जमीन विवाद और फुटबॉल बनता सिस्टम

    जनता दरबार में पहुंचीं संतोष मृदुला ने अपनी गंभीर समस्या साझा की. उनका विवाद उनके पिता की करीब 1970 में खरीदी गई जमीन से जुड़ा है, जिस पर अभी भू-माफिया का कब्जा चल रहा है. वह पिछले साल दिसंबर से एफआईआर दर्ज कराने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं. मामला डीसी से थाना, थाना से अंचल कार्यालय और अंचल से वापस थाने के बीच लगातार घूम रहा है, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पा रही है.

    इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके पिता का निधन 23 साल पहले हो चुका है. इसके बावजूद माफिया उनके पिता को जिंदा दिखाकर उनके नाम से माफी के आवेदन जमा कर रहे हैं. फर्जी दस्तावेजों के सहारे उस जमीन पर दो मंजिला इमारत भी खड़ी कर दी गई है. संतोष मृदुला ने बताया कि सुरक्षा के डर से उन्हें हेलमेट पहनकर बैठना पड़ता है. जनता दरबार की व्यवस्था पर निराशा जताते हुए उन्होंने कहा कि उनका मामला एक फुटबॉल की तरह बन गया है, जिसे हर दफ्तर सिर्फ एक से दूसरे दरवाजे पर किक मार रहा है और कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा.

    घरेलू हिंसा के मामले में मिली राहत

    दूसरी तरफ मोहम्मद नईम नाम के एक शख्स अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाने पहुंचे थे. उनकी बेटी की शादी को केवल दो साल हुए हैं. आरोप है कि उनका दामाद शराब पीकर लगातार मारपीट करता है. उसने बेटी के साथ-साथ छह महीने के छोटे बच्चे को भी प्रताड़ित किया, जिससे बच्चे के कान का पर्दा तक फट गया. इसके साथ ही वह घर के खर्च के लिए पैसे भी नहीं देता. इस मामले में थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है. नईम ने इस कार्रवाई पर संतोष जताया और कहा कि उन्हें जनता दरबार से राहत मिली है.

    हत्या के मामले में इंसाफ का इंतजार

    इसी दरबार में सीमा नाम की एक महिला भी पहुंची थीं, जिनके भाई की तीन महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. सीमा के अनुसार, भाई के दो दोस्त उसे बार-बार घर से बुलाकर ले जाते थे. आखिरी बार जब वे उसे ले गए, तो अगली सुबह भाई की मौत की खबर आई. परिवार का आरोप है कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है. शक के आधार पर दोनों दोस्तों को पुलिस ने पकड़ा तो था, लेकिन कुछ ही घंटों में उन्हें छोड़ दिया गया. परिवार आज भी इंसाफ की उम्मीद में भटक रहा है, हालांकि सीमा को अब भी भरोसा है कि प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा और उनके भाई को न्याय मिलेगा.

    शुरुआती चरण में है व्यवस्था : एसएसपी

    इन सभी शिकायतों और जनता की राय पर जब रांची के एसएसपी राकेश रंजन से बात की गई, तो उन्होंने व्यावहारिक पक्ष सामने रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी व्यवस्था अभी अपने शुरुआती दौर में है और इसका केवल तीसरा हफ्ता ही है. इतनी जल्दी किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा. इस कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितने लंबे समय तक चलता है और जनता से इस पर कैसा फीडबैक मिलता है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि पुलिस प्रशासन लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करता रहेगा.

    सवाल अब भी वही है- जनता दरबार आम आदमी को सच में इंसाफ दिला पा रहा है, या फिर सिर्फ कागजों पर चलने वाली एक और कवायद बनकर रह जाएगा? जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, ये सवाल बना रहेगा।

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    A mix of relief and hope at the Ranchi SSP's public grievance hearing. कहीं उम्मीद रांचीः एसएसपी के जनता दरबार में कहीं राहत
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