Sahebganj : अमर शहीद सिदो-कान्हू मुर्मू के 171वें हूल दिवस समारोह को लेकर साहेबगंज के भोगनाडीह में प्रशासन की कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. एसडीएम अमर जॉन आईन्द की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत 53 लोगों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के जरिए कभी को कोर्ट में हाजिर होने और 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड भरने का निर्देश दिया है. इनमें भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हांसदा समेत कई ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और आसपास के गांवों के लोग शामिल हैं. लिस्ट में तलबड़िया, पहाड़पुर, हड़वाडीह, किताजोर, सरायद्वान, भागाबांध, पथरा, पगरपहाड़ सहित बरहेट, बोरियो और तालझारी क्षेत्र के निवासी भी शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि हूल दिवस के मौके पर कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने इसे आदिवासी समाज और हूल आंदोलन की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है.
क्या है पूरा मामला
बरहेट थानेदार कुमार गौरव ने बीते 25 जून को एक नॉन एफआईआर रिपोर्ट एसडीएम को भेजी थी. रिपोर्ट में कहा गया कि 30 जून को आयोजित होने वाले 171वें हूल दिवस समारोह के दौरान कुछ लोगों की गतिविधियों से शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. इसी रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/135 के तहत कार्रवाई शुरू की. नोटिस में सभी 53 लोगों को निर्देश दिया गया कि वे कोर्ट में हाजिर होकर 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और दो प्रतिभूतियों के साथ शांति बनाए रखने का बॉन्ड दाखिल करें. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी अपराध की सजा नहीं, बल्कि एहतियात के तौर पर की गई है ताकि समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.
चंपाई सोरेन का हमला, कहा- सरकार ने वीर भूमि को पुलिस छावनी बना दिया
इस कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि हूल दिवस के दिन वीर भूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है. उनके अनुसार पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और 58 मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं. चंपाई सोरेन ने कहा कि सन 1855 में जब वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हूल आंदोलन शुरू किया था, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि आजादी के इतने वर्षों बाद उनके अपने गांव के लोगों को उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भी सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी और बॉन्ड भरना पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को भूल चुकी है. उनके मुताबिक अब न अंग्रेजी शासन है और न राजतंत्र, फिर भी आदिवासी समाज के लोगों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वीर सिदो-कान्हू की विरासत को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को जनता जवाब देगी.
क्या है BNSS की धारा 126?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 का मकसद किसी व्यक्ति को सजा देना नहीं है. यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह लगता है कि किसी व्यक्ति से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है, तो वह उससे कारण बताने और भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का निर्देश दे सकता है. इस प्रक्रिया में व्यक्ति से एक निश्चित समय तक शांति बनाए रखने का निजी मुचलका और जरूरत पड़ने पर जमानती भी मांगे जा सकते हैं. यदि व्यक्ति नियमों का पालन करता है तो उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती.

