Ranchi : रामगढ़ जिले के सीसीएल अरगड्डा क्षेत्र में शनिवार का दिन चार परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकले चार युवक वापस नहीं लौटे। बंद पड़ी खदान के पास अवैध तरीके से कोयला निकालने के दौरान खदान के भीतर दम घुटने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए रामगढ़ के डीसी और एसपी पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिले में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा था, लेकिन प्रशासन ने इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए।
30 फीट गहरे गड्ढे में उतरे थे चारों युवक
जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह करीब नौ बजे चार युवक काजू बगान जंगल क्षेत्र में बने एक अवैध खदाननुमा गड्ढे में कोयला निकालने के लिए उतरे थे। यह इलाका बंद पड़ी भूमिगत खदान के पास स्थित है, जहां लंबे समय से चोरी-छिपे कोयला निकालने की बातें सामने आती रही हैं। युवक जैसे ही खदान के अंदर बने सुरंगनुमा हिस्से में पहुंचे, वहां ऑक्सीजन की भारी कमी और जहरीली गैसों के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। काफी देर तक जब कोई बाहर नहीं निकला तो आसपास मौजूद लोगों को अनहोनी का अंदेशा हुआ और अधिकारियों को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही दौड़ी रेस्क्यू टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद सीसीएल अरगड्डा के सेफ्टी ऑफिसर रमेश कुमार और एरिया क्वालिटी मैनेजर एस.एन. तिवारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद माइंस रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। माइंस सुपरिटेंडेंट विकास कुमार के नेतृत्व में 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने अभियान शुरू किया। गिद्दी अस्पताल से डॉ. सागर कुमार के नेतृत्व में मेडिकल टीम भी एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। खदान के अंदर का माहौल बेहद खतरनाक होने के कारण रेस्क्यू टीम को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ी।
घंटों की मशक्कत के बाद निकाले गए शव
रेस्क्यू टीम ने कई घंटों तक अभियान चलाकर चारों युवकों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान सिरका बुधबाजार निवासी किशोर और आशीष तथा टोंगी निवासी देवा और डब्लू के रूप में हुई। जब चारों को बाहर लाया गया तो मौके पर मौजूद परिजनों की उम्मीदें अभी भी जिंदा थीं। उन्हें तुरंत इलाज के लिए रांची रोड स्थित होप अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद सभी को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही अस्पताल और गांव में चीख-पुकार मच गई।
खदान के भीतर मौत का जाल बिछा था
रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि खदान के ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन का स्तर करीब नौ प्रतिशत था, जबकि अंदर बने हिस्से में यह घटकर महज दो प्रतिशत रह गया था। सामान्य स्थिति में हवा में लगभग 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है। जांच के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड समेत कई जहरीली गैसों की मौजूदगी भी पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है और उसकी जान जा सकती है।
मौत के बाद उठे प्रशासन पर सवाल
घटना के बाद इलाके में यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर बंद खदानों के आसपास अवैध खनन कैसे जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से ऐसे इलाकों में चोरी-छिपे कोयला निकाला जाता रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस पूरे मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अवैध खनन पर रोक लगाई जाती तो चार युवकों की जान बच सकती थी। उन्होंने रामगढ़ के डीसी और एसपी पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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