Ranchi : झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में एक बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और उनके करीबियों पर आउटसोर्सिंग, दवा खरीद और टेंडर प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और झारखंड के मुख्य सचिव को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
शिकायत पत्र के अनुसार, राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री के करीबियों ने पूरे सिस्टम को कथित तौर पर हाइजैक कर लिया है। आरोप है कि मंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है और चहेती कंपनियों को ऊंचे दरों पर काम दिलाया जाता है। विशेष रूप से रिम्स और रांची सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग के कार्यों में भारी हेराफेरी की बात कही गई है।
इन कंपनियों और व्यक्तियों पर लगे गंभीर आरोप
शिकायत में तीन भाइयों खवाजा अब्दुल ओएदीर अहमद भट, खवाजा मोहसिन अहमद और खवाजा फरहान अहमद के नाम का उल्लेख किया गया है। दावा है कि ये तीनों भाई मंत्री के निजी आवास से कई फर्मों का संचालन करते हैं। इनमें हिंद इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, क्योरिंग फार्मास्यूटिकल्स, भारत आर्ट्स एंड सप्लायर्स, ऑल टाइम मेडिसिन, हृदयालया और मयूरी सॉल्यूशन जैसी कंपनियां शामिल हैं। आरोप है कि जैम (GeM) और ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया में नियमों में बदलाव करवाकर इन फर्मों को टेंडर दिलाए जाते हैं।
कोडरमा सिविल सर्जन कार्यालय का उदाहरण
शिकायत में कोडरमा जिले में दवा और सामग्री खरीद के लिए जारी निविदा संख्या 05/26 का उदाहरण दिया गया है। आरोप है कि इसमें ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जिससे अन्य निविदाकर्ता बाहर हो जाएं और केवल मंत्री से जुड़ी फर्मों को ही काम मिले। शिकायतकर्ता का कहना है कि दवा खरीद और सिविल वर्क के काम केवल कागजों पर ही अधिक दिखाए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति अलग है।

जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि इस रैकेट का विस्तार कोडरमा, दुमका, जामताड़ा, देवघर, साहेबगंज और रांची जैसे जिलों तक फैला हुआ है। इसमें हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन और व्यक्तिगत बैंक खातों में संदिग्ध राशि जमा होने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत की प्रतियां पीएमओ, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), एनआईए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और राज्य के मुख्य सचिव को भेजी गई हैं। पत्र के अंत में इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव ने जांच के आदेश दे दिए है। इस आदेश के बाद झारखण्ड में राजनितिक हलचल तेज होने की सम्भावना बनती दिखाई दे रही है।
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