Gumla : झारखंड के गुमला जिले के भरनो प्रखंड में जंगली हाथी के आतंक से ग्रामीण सहमे हुए हैं। बीती रात एक अकेले जंगली हाथी ने प्रखंड के समसेरा और लालटोली गांव में जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथी ने न केवल चार ग्रामीणों के घरों को मलबे में तब्दील कर दिया, बल्कि घरों के अंदर रखा क्विंटल भर धान और अन्य अनाज भी चट कर गया और बर्बाद कर दिया। इस घटना से प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
दो गांवों में बारी-बारी से हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी सबसे पहले लालटोली गांव में दाखिल हुआ। वहां उसने दो गरीब परिवारों के आशियानों को निशाना बनाया और दीवारों को ढहा दिया। इसके बाद हाथी का रुख समसेरा गांव की ओर हुआ, जहां उसने फिर से दो घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथी के चिंघाड़ने की आवाज सुनकर ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों ने साहस दिखाकर हाथी को खदेड़ा
हाथी के बढ़ते उत्पात को देखते हुए ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए एकजुटता दिखाई। दर्जनों ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े, पटाखे और हाथ में मशाल लेकर हाथी को घेरा और उसे गांव से दूर जंगल की ओर खदेड़ने में कामयाबी पाई। हालांकि, हाथी के अभी भी पास के जंगलों में जमे होने की आशंका से लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीम ने क्षतिग्रस्त घरों और बर्बाद हुई फसलों का जायजा लिया। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए टॉर्च लाइट और पटाखे उपलब्ध कराए गए हैं। पीड़ित ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है ताकि वे अपने घरों की मरम्मत करा सकें।
झारखंड में गहराता मानव हाथी संघर्ष
गुमला की यह घटना झारखंड में बढ़ते मानव हाथी संघर्ष की एक और कड़ी है। राज्य के विभिन्न जिलों विशेषकर चतरा, लोहरदगा, खूंटी, सिमडेगा और सरायकेला में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।
आंकड़ों और नुकसान पर एक नजर:
1. जान-माल का नुकसान: झारखंड में हर साल हाथियों के हमले में औसतन 70 से 80 लोग अपनी जान गंवा देते हैं। अकेले पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें तो सैकड़ों लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हुए हैं।
2. फसलों की बर्बादी: हाथियों के झुंड हर साल हजारों एकड़ में लगी धान, मक्का और गन्ने की फसल को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों की कमर टूट जाती है।
3. घरों का विनाश: ग्रामीण इलाकों में हाथियों द्वारा कच्चे और खपरैल घरों को तोड़ना एक आम समस्या बन गई है। हाथी अक्सर अनाज की खुशबू से घरों की ओर आकर्षित होते हैं।
4. संघर्ष का कारण: जंगलों की अंधाधुंध कटाई, हाथियों के प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) में इंसानी दखल और भोजन की कमी के कारण ये गजराज अब रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।
सरकार की ओर से हाथियों के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को 4 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि और फसलों के नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया काफी जटिल है, जिसे सरल बनाने की जरूरत है।
Also Read : एक्शन मोड में खूंटी एसपी ऋषभ गर्ग, उलीहातु से थाना व कोर्ट तक का किया औचक निरीक्षण


