Garhwa : झारखंड के पलामू प्रमंडल में जमीन के काले कारोबार और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं पर अब पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। डीआईजी किशोर कौशल ने पूरे प्रमंडल में भू-माफियाओं के खिलाफ “मिशन मोड” में अभियान चलाने का आदेश दिया है। डीआईजी ने साफ निर्देश दिया है कि गढ़वा जिला, पलामू जिला और लातेहार जिला के पुलिस कप्तान एक सप्ताह के भीतर सक्रिय जमीन माफियाओं की पूरी रिपोर्ट सौंपें। इस आदेश के बाद तीनों जिलों की पुलिस हरकत में आ गई है और जमीनी स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
सिर्फ छोटे नहीं, बड़े सिंडिकेट पर नजर
पुलिस अब सिर्फ छोटे दलालों तक सीमित नहीं रहेगी। इस बार फोकस उन लोगों पर है जो पीछे से पूरा जमीन सिंडिकेट चलाते हैं। यानी अब ऐसे “मास्टरमाइंड” पर सीधी कार्रवाई की तैयारी है जो पर्दे के पीछे रहकर खेल चला रहे हैं।
हाल की घटनाओं से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में गढ़वा समेत कई इलाकों में जमीन विवाद के चलते फायरिंग और हत्या जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ रसूखदार लोग अपराधियों को आर्थिक मदद भी दे रहे हैं।
कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रेल खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब माफियाओं के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इसका मकसद यह है कि पूरे नेटवर्क को एक साथ उजागर किया जा सके, ताकि कोई भी बच न सके।
तीन श्रेणियों में तैयार हो रही सूची
पुलिस ने जमीन माफियाओं को तीन कैटेगरी में बांटने की तैयारी की है-
श्रेणी A (हाई रिस्क): बड़े अपराधी और गैंग से जुड़े लोग
श्रेणी B (मिड लेवल): दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले और बिचौलिये
श्रेणी C (एजेंट): छोटे मददगार और जमीन चिन्हित करने वाले लोग


