New Delhi : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक अहम कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक आतंकी सहयोगी की संपत्तियां जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई वर्ष 2017 में हुए सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले से जुड़े मामले में की गई है, जिसमें पांच जवान शहीद हुए थे और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
एनआईए ने यह कदम गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 33(1) के तहत उठाया है। जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत के हालिया आदेश के बाद एजेंसी ने यह संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की, जिसे घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियां पुलवामा जिले के अवंतीपोरा क्षेत्र के लेथपोरा में स्थित हैं। इनमें जमीन के कई हिस्से और एक रिहायशी मकान शामिल है, जो आरोपी फैयाज अहमद मग्रे के नाम दर्ज थे। एनआईए का कहना है कि ये संपत्तियां आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े पैसों से खरीदी गई थीं। फैयाज को फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था और अगस्त 2019 में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। फिलहाल मामले में अदालत में सुनवाई जारी है।
गौरतलब है कि 30 दिसंबर 2017 की रात लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर तीन आतंकियों ने फिदायीन हमला किया था। हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने कैंप में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया था।
एनआईए की जांच में सामने आया है कि फैयाज अहमद मग्रे जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) था। उसने हमले की साजिश रचने वाले आतंकियों के साथ बैठकों में हिस्सा लिया था। साथ ही उसने नूर मोहम्मद तंत्रे और मुदासिर अहमद खान समेत अन्य आतंकियों के साथ मिलकर कैंप की रेकी की थी और हथियारों की व्यवस्था में भी भूमिका निभाई थी।
एनआईए का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई आतंकियों की आर्थिक ताकत को कमजोर करेगी और भविष्य में इस तरह की आतंकी साजिशों पर रोक लगाने में मददगार साबित होगी।
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