Hazaribagh : कटकमदाग थाना क्षेत्र के पसई में रविवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक युवक का शव संदिग्ध हालात में बरामद हुआ। मृतक की पहचान 40 वर्षीय राजेश साव के रूप में हुई है, जो इलाके में चिकन सेंटर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। लेकिन यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सवालों से भरी एक कहानी है- जिसमें जुआ, विवाद और सिस्टम की कथित लापरवाही की परतें खुलती नजर आ रही हैं। परिजनों के मुताबिक, 11 अप्रैल की रात करीब 10 बजे राजेश साव अपनी दुकान बंद कर घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटे। पूरी रात खोजबीन के बाद रविवार सुबह सूचना मिली कि उनका शव बीकेडी बानादाग कोल साइडिंग के पास पड़ा है। शव मिलने की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। रोते-बिलखते परिजनों ने साफ तौर पर हत्या की आशंका जताई है। मृतक के भाई ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस स्थान के पास शव मिला है, वहां लंबे समय से जुआ का अड्डा संचालित हो रहा है। उनका दावा है कि जुआ खेलने के दौरान हुए विवाद में ही राजेश साव की हत्या कर दी गई। इस आरोप ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने हजारीबाग-सिमरिया मुख्य सड़क को जाम कर दिया और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करने लगे। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसी बीच, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव भी घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने खुलकर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इलाके में लंबे समय से जुए का अवैध कारोबार चल रहा है, जिसकी जानकारी पुलिस को भी है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।कटकमदाग थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, इस बयान से लोगों का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है।
बस स्टैंड में भी सजा है ‘जुए का दरबार’
हजारीबाग में जुए का खेल सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, शहर के पुराने बस स्टैंड में भी वर्षों से खुलेआम जुआ खेला जा रहा है। बताया जाता है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन एक स्थानीय कारोबारी करता है, जिसने कथित तौर पर पुलिस और कुछ तथाकथित पत्रकारों को भी मैनेज कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि अगर कोई इस गोरखधंधे के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसी को बदनाम करने या फंसाने की साजिश शुरू हो जाती है।ऐसा पहले हुआ है। इस खेल में कुछ दलाल और तथाकथित पत्रकार भी शामिल बताए जाते हैं। बावजूद इसके, सच बोलने वाले अब भी डरे नहीं हैं, क्योंकि हर कोई बिकाऊ नहीं होता। राजेश साव की मौत ने एक बार फिर हजारीबाग की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज एक हत्या है, या फिर उस सिस्टम की नाकामी का परिणाम, जो अपराध को पनपने देता है? अब नजरें पुलिस पर टिकी हैं कि क्या वह इस रहस्य से पर्दा उठा पाएगी या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
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